अक्षय तृतीया पर प्रशासन रखेगा बाल विवाह पर नजर

बड़वानी :-बाल एवं जनसमुदाय विवाह मप्र शासन महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रदेश में बाल विवाह रोकने के लिए वर्ष 2013 से लाड़ो अभियान संचालित किया जा रहा है। जिसके तहत विभिन्न विभागों के समन्वय से को विभिन्न विधियों के माध्यम से बाल विवाह रोकने के लिए जागरूक किया जा रहा है। इस वर्ष 20 अप्रैल को अक्षय तृतीया के अवसर पर जिले में आयोजित होने वाले विवाह और सामूहिक विवाह की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने विशेष रणनीति बनाकर विभिन्न विभागों की जिम्मेदारी तय की है।
बाल विवाह प्रथा के उन्मूलन के लिए तैयार की गई कार्य योजना के तहत आंगनवाड़ी स्तर पर जिस परिवार में बच्चों का विवाह तय हुआ है, उनके उम्र की जांच, यदि बाल विवाह है तो विधि अनुरूप विवाह की निर्धारित उम्र तक विवाह स्थगित करने के लिए परामर्श देना और राज्य द्वारा चलाई जा रही विभिन्न कौशल विकास सबंधित योजनाओं की जानकारी दी जाएगी।
विवाह सेवा प्रदाता जैसे टेंट हाउस, विवाह पत्रिका प्रिंटर, बैंड बाजा, धर्मगुरू, मोलवी और समाज के मुखिया आदि को भी बाल विवाह में सेवा न देने की अपील शामिल है। वहीं अक्षय तृतीया पर बाल विवाह पर रोक के लिए जिलेभर में प्रशासन व पुलिस अधिकारियों की संयुक्त टीम बनाई हैं, जो भ्रमण कर वर-वधु की उम्र संबंधी दस्तावेजों की जांच करेगी। वहीं बाल विवाह की स्थिति से संबंधितों के विरूद्ध बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत कार्यवाही की जाएगी।
बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के अनुसार 18 वर्ष से कम उम्र की बालिका एवं 21 से कम उम्र के बालक का विवाह बाल विवाह माना जाकर कानूनन अपराध है तथा दोषी को 2 वर्ष की सजा तथा 1 लाख रुपए का जुर्माना या दोनों सजाओं का प्रावधान है। बाल विवाह होने की शिकायत 1098, डायल 100 एवं महिला हेल्पलाइन 181 पर की जा सकती है। शिकायतकर्ता का नाम गोपनीय रखा जाएगा।