*ग्राम पंचायत की अनुमति बिना कैसे बस गई कॉलोनी? अवैध कॉलोनी में ट्रांसफार्मर, खंभे और केबल लगाने पर बिजली विभाग सवालों के घेरे में*
*झुनकू ग्राम पंचायत का दावा— न अनुमति, न एनओसी, फिर किस आधार पर मिली बिजली सुविधा? किस अधिकारी के आदेश पर लगे ट्रांसफार्मर और खंभे?*
*संवाददाता सतीष सेन*
*मोबाइल नंबर 9752 739060*
देवरी (सागर)। देवरी विकासखंड की ग्राम पंचायत झुनकू में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के पीछे एवं पीएम शवगृह (पोस्टमार्टम हाउस) के सामने विकसित की गई कथित अवैध कॉलोनी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम पंचायत के सचिव और सरपंच प्रतिनिधि ने स्पष्ट दावा किया है कि पंचायत द्वारा इस कॉलोनी के लिए आज तक न कोई अनुमति दी गई और न ही कोई अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) जारी किया गया। इसके बावजूद कॉलोनी में बिजली विभाग द्वारा ट्रांसफार्मर, बिजली के खंभे और केबल स्थापित कर विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था किए जाने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार कॉलोनी के मुख्य प्रवेश द्वार के दोनों ओर ट्रांसफार्मर स्थापित किए गए हैं और पूरी कालोनी में बिजली के खंभे एवं केबल बिछा दिए गए हैं। हैरानी की बात यह है कि जिस कॉलोनी का नाम तक स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया और जिसकी वैधानिक स्थिति विवादों में है, वहां इतनी बड़ी विद्युत अधोसंरचना किस प्रक्रिया के तहत स्थापित कर दी गई।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि ग्राम पंचायत ने कोई अनुमति नहीं दी, नगर एवं ग्राम निवेश विभाग से आवश्यक स्वीकृतियां उपलब्ध नहीं थीं और वैधानिक दस्तावेजों का अभाव था, तो बिजली विभाग ने किस आधार पर ट्रांसफार्मर लगाने की स्वीकृति प्रदान की? क्या संबंधित अधिकारियों ने कॉलोनी के दस्तावेजों की जांच की थी या बिना सत्यापन के ही औपचारिकताएं पूरी कर दी गईं?
मामले में यह भी सवाल उठ रहे हैं कि ट्रांसफार्मर, बिजली के खंभे और केबल लगाने का आदेश किस अधिकारी ने दिया? क्या इसके लिए ग्राम पंचायत, नगर एवं ग्राम निवेश विभाग तथा अन्य सक्षम प्राधिकरणों से आवश्यक अनुमति और अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त किए गए थे? यदि ऐसा नहीं हुआ, तो जिम्मेदारी किस अधिकारी की है और क्या इसकी विभागीय जांच होगी?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब किसी कॉलोनी में बिजली, सड़क और अन्य सरकारी सुविधाएं उपलब्ध हो जाती हैं, तो आम लोग उसे वैध मानकर प्लॉट खरीद लेते हैं। यदि बाद में प्रशासन उस कॉलोनी को अवैध घोषित करता है, तो सबसे बड़ा आर्थिक नुकसान आम नागरिकों और भू-खरीदारों को उठाना पड़ता है।
गौरतलब है कि देवरी क्षेत्र में कई कथित अवैध कॉलोनियों को लेकर प्रशासन द्वारा समय-समय पर नोटिस जारी किए गए, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि नोटिसों के बाद भी किसी कॉलोनाइजर के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। नतीजतन अवैध कॉलोनियों का विकास और प्लॉटों की बिक्री लगातार जारी रही।
अब स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि कॉलोनाइजरों ने बिना वैधानिक स्वीकृतियों के कॉलोनी विकसित की है तो उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि बिना आवश्यक दस्तावेजों के बिजली विभाग ने किस आधार पर ट्रांसफार्मर, खंभे और केबल लगाने की अनुमति दी। यदि जांच में किसी अधिकारी की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो उसके विरुद्ध भी सख्त कार्रवाई की जाए।
*देवरी के प्रशासनिक अधिकारियों से मुख्य सवाल*
*ग्राम पंचायत की अनुमति और एनओसी के बिना कॉलोनी कैसे विकसित हुई?*
*किस अधिकारी के आदेश पर ट्रांसफार्मर, खंभे और केबल लगाए गए?*
*क्या बिजली विभाग ने वैधानिक दस्तावेजों का सत्यापन किया था?*
*कॉलोनी का नाम और वैधता आज तक स्पष्ट क्यों नहीं है?*
*प्रशासन और संबंधित विभाग जिम्मेदारी कब तय करेंगे*
*ऐसी अवैध कॉलोनर पर नोटिस की कार्रवाई तक सीमित रहता है प्रशासन*
*इनका कहना है*
*"मेरे द्वारा इस कॉलोनी के लिए कोई अनुमति नहीं दी गई है। कॉलोनी संचालित करने वाले किसी भी व्यक्ति ने मुझसे संपर्क नहीं किया। ग्राम पंचायत ने आज तक कोई एनओसी जारी नहीं की है। मुझे तो इस कॉलोनी का नाम तक ज्ञात नहीं है।"*
— *लक्ष्मण लोधी, सचिव, ग्राम पंचायत झुनकू*
*"मेरी ग्राम पंचायत में विकसित की गई इस कॉलोनी के संबंध में ग्राम पंचायत को कोई जानकारी नहीं है और न ही पंचायत द्वारा कोई स्वीकृति दी गई है। यह कॉलोनी अवैध रूप से विकसित की गई है। इसके बावजूद बिजली विभाग द्वारा ट्रांसफार्मर, खंभे और केबल लगा दिए गए हैं। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।"*
— *अंकित पटेल, सरपंच प्रतिनिधि, ग्राम पंचायत झुनकू*
*मेरे संज्ञान में अवैध कॉलोनी का मामला है। मैंने रिकॉर्ड मांगा है और जल्द ही कार्रवाई करवाता हूं*
*देवरी एसडीएम मुनव्वर खान* "
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