*बांधवगढ़ में ‘रक्षक’ ही परेशान, फिर आंदोलन की तैयारी*
*दैनिक वेतनभोगियों का आरोप—पीएफ, वेतन-भत्ते और सुरक्षा के सवाल वर्षों से लंबित; एक सप्ताह में धरने की तारीख घोषित करने की चेतावनी*

उमरिया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा में तैनात दैनिक वेतनभोगियों का आक्रोश एक बार फिर सामने आया है। कर्मचारियों का आरोप है कि वर्षों से उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। समय पर वेतन, शासन से मिलने वाले भत्ते और ड्यूटी के दौरान सुरक्षा को लेकर कर्मचारी परेशान हैं।
*2017 के आदेश के बाद भी पीएफ पर स्थिति साफ नहीं*
कर्मचारियों के अनुसार वर्ष 2017 में पीएफ कटौती संबंधी आदेश जारी हुआ था, लेकिन आज तक यह स्पष्ट नहीं है कि पात्र कर्मचारियों के वेतन से कब से और कितनी पीएफ राशि काटी गई तथा वह राशि संबंधित पीएफ खातों में जमा हुई या नहीं। कर्मचारियों ने मांग की है कि विभाग प्रत्येक कर्मचारी की पीएफ कटौती और खाते में जमा राशि का स्पष्ट विवरण सार्वजनिक करे।
*जंगल में जोखिम, शिकायत पर कार्रवाई का आरोप*
दैनिक वेतनभोगियों का कहना है कि हाथी, बाघ और भालू जैसे वन्यजीवों के बीच ड्यूटी करनी पड़ती है, लेकिन पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि शिकार, अवैध कटाई या वनभूमि अतिक्रमण जैसी गतिविधियों की सूचना देने पर स्थानांतरण या नौकरी से हटाए जाने का दबाव बनाया जाता है। इन आरोपों पर विभाग का पक्ष सामने आना बाकी है।
*अब अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी*
कर्मचारियों ने कहा है कि लगातार उपेक्षा के चलते वे पुनः आंदोलन की राह पर जाने को मजबूर हैं। एक सप्ताह के भीतर अनिश्चितकालीन धरने की तारीख घोषित करने की चेतावनी दी गई है। कर्मचारियों का कहना है कि मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की जिम्मेदारी विभागीय अधिकारियों की होगी।
बांधवगढ़ के ‘रक्षकों’ का सवाल सीधा है—जब वे जंगल की सुरक्षा में दिन-रात खड़े हैं, तो उनके भविष्य और सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?