शिक्षक दिवस पर एम.पी. लॉ सर्कल एवं शासकीय आदर्श महाविद्यालय, विदिशा द्वारा आयोजित संवाद कार्यक्रम में गांधी और संविधान के मूल भावना पर हुई सार्थक चर्चा
विदिशा, 5 सितम्बर। शिक्षक दिवस के अवसर पर एम.पी. लॉ सर्कल, विदिशा द्वारा शासकीय आदर्श महाविद्यालय, विदिशा के सहयोग एवं आतिथ्य में शिक्षकों, अधिवक्ता, विद्यार्थियों, एवं नागरिकों के साथ एक विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ उपस्थित शिक्षकों एवं विशिष्ट अतिथियों का तिलक कर सम्मान एवं स्वागत करके किया गया।
“कार्यक्रम में अधिवक्ता श्री मोहन दीक्षित, सहायक प्राध्यापक श्री अरविंद द्विवेदी एवं श्री कमलेश दुबे विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की मेजबान संस्था शासकीय आदर्श महाविद्यालय, विदिशा के प्राचार्य डॉ. ब्रह्मदीप अलूने की गरिमामयी उपस्थिति एवं मार्गदर्शन ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया।”
कार्यक्रम का संचालन श्रीमती शिखा दुबे द्वारा किया गया। इसके पश्चात अधिवक्ता रीतेश साहू ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए उपस्थित अतिथियों का परिचय कराया तथा संवाद कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर प्राध्यापक श्री अरविंद द्विवेदी ने शिक्षक दिवस के महत्व पर अपने विचार व्यक्त करते हुए डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन से जुड़े प्रेरक प्रसंग साझा किए। उन्होंने समाज निर्माण में शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए सभी उपस्थित शिक्षकों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम के दूसरे महत्वपूर्ण सत्र में अधिवक्ता मोहन दीक्षित ने “संविधान की मूल भावना एवं वर्तमान” विषय पर विस्तृत एवं विचारोत्तेजक चर्चा की। उन्होंने भारतीय संविधान की प्रस्तावना में निहित “हम” अर्थात ‘We, the People’ का महत्व और उसकी लोकतांत्रिक व्यवस्था में भूमिका को समझाया। उन्होंने कहा कि संविधान केवल शासन का दस्तावेज नहीं, बल्कि समाज में समानता, न्याय, गरिमा और सामाजिक एकता स्थापित करने का माध्यम है।
अपने वक्तव्य के दौरान अधिवक्ता दीक्षित ने दैनिक जीवन से जुड़े उदाहरणों के माध्यम से यह समझाया कि संवैधानिक मूल्यों का वास्तविक महत्व हमारे व्यवहार और सामाजिक दृष्टिकोण में दिखाई देना चाहिए। उन्होंने समाज में व्याप्त असमानताओं और भेदभाव को समाप्त करने में संविधान की भूमिका पर चर्चा करते हुए इसे समाज के विभिन्न वर्गों के बीच एक सेतु के रूप में बताया।
इसके बाद आयोजित प्रश्नोत्तर एवं संवाद सत्र में उपस्थित प्रतिभागियों ने संवैधानिक जागरूकता और आम नागरिकों की भूमिका से संबंधित प्रश्न रखे। इस दौरान विशिष्ट अतिथि श्री कमलेश दुबे जी ने अपने लंबे अनुभवों और न्यायिक व्यवस्था को निकट से देखने के अनुभवों को साझा करते हुए प्रतिभागियों के प्रश्नों का व्यावहारिक एवं प्रेरक उदाहरणों के माध्यम से उत्तर दिया।
कार्यक्रम के अगले सत्र में “गांधी हैं तो भारत है” पुस्तक पर चर्चा आयोजित की गई। डॉ. ब्रह्मदीप अलूने ने गांधीजी के विचारों की वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने पहले अपनी एक छात्रा, जिन्होंने हाल ही में उक्त पुस्तक का अध्ययन किया था, को पुस्तक के संबंध में अपने विचार रखने का अवसर दिया।
डॉ. अलूने ने अपने वक्तव्य में महात्मा गांधी के भारत संबंधी सपने, उनके विचारों की समकालीन प्रासंगिकता तथा गांधीजी से जुड़े विभिन्न प्रचलित प्रश्नों और मिथकों पर तथ्यपरक चर्चा की। उन्होंने गांधीजी और भगत सिंह से जुड़े प्रश्नों तथा गांधीजी की भूमिका को ऐतिहासिक संदर्भों के साथ समझाने का प्रयास किया। साथ ही गांधीजी, डॉ. भीमराव अम्बेडकर तथा वंचित एवं दलित वर्गों के सामाजिक उत्थान से जुड़े प्रश्नों पर भी सार्थक चर्चा हुई।
कार्यक्रम में यह संदेश प्रमुखता से उभरकर आया कि गांधीवादी विचार, शिक्षक की भूमिका और संविधान के मूल मूल्य—समानता, न्याय, स्वतंत्रता, बंधुत्व एवं मानवीय गरिमा—आज भी एक जागरूक और समतामूलक समाज के निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षकों, विद्यार्थियों, अधिवाक्तायो नागरिकों एवं अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही।
आयोजक: एम.पी. लॉ सर्कल, विदिशा
सहयोग एवं आतिथ्य:
शासकीय आदर्श महाविद्यालय, विदिशा
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