संजय गांधी अस्पताल में ‘डेथ’ का डिक्लेरेशन… शव वाहन में पहुंचते ही जिंदा हुआ बुजुर्ग!

रीवा के संजय गांधी अस्पताल से स्वास्थ्य व्यवस्था को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। 66 वर्षीय बुजुर्ग को मेडिसिन विभाग में डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया, परिजनों को शव सुपुर्दगी की पर्ची थमा दी गई। रोते-बिलखते परिजन जब शव वाहन में बुजुर्ग का शरीर रखने लगे, तभी अचानक शरीर में हरकत हुई और बुजुर्ग होश में आ गया। सीधी से उपचार के लिए आए गिरजा गुप्ता को उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद 4 तारीख की रात संजय गांधी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था। अगले दिन आईसीयू में मौजूद चिकित्सकीय टीम ने फ्लैट ईसीजी आने के बाद बुजुर्ग को मृत घोषित कर दिया। परिजनों को शव सुपुर्दगी की पर्ची भी थमा दी गई। लेकिन ग्राउंड फ्लोर पर शव वाहन में शरीर रखते समय बुजुर्ग दर्द से कराह उठा। परिजनों के होश उड़ गए, जिसे कुछ मिनट पहले मृत बताया गया था, वह जिंदा था। परिजन तत्काल बुजुर्ग को वापस मेडिसिन वार्ड लेकर पहुंचे, जहां अब उनका वेंटिलेटर पर उपचार जारी है। सवाल सिर्फ इतनी बड़ी मेडिकल चूक का नहीं, सवाल उस सिस्टम पर है, जहां मौत की पुष्टि से पहले क्या जरूरी चिकित्सकीय प्रक्रियाएं पूरी की गईं? मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप बघेल ने प्रथम दृष्टया सीनियर रेजिडेंट से बड़ी चूक की बात स्वीकार की है। उनका कहना है कि मामले की जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी। मौत की पर्ची हाथ में थी… शव वाहन तैयार था… लेकिन सांसें चल रही थीं। अब जांच में यही सामने आना बाकी है कि इस गंभीर चूक के लिए जिम्मेदार कौन है और अस्पताल प्रबंधन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ जांच तक सीमित रहता है या जवाबदेही भी तय करता है