*ग्राम पंचायत का बड़ा खुलासा: बिना NOC बस गईं कॉलोनियां, बिजली विभाग ने कैसे जला दी रोशनी? देवरी में अवैध कॉलोनियों का खेल बेनकाब, करोड़ों के राजस्व पर डाका!*
*पंचायत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि बैदेही नगर कॉलोनी एवं इंदिरा परिसर कॉलोनी के लिए ग्राम पंचायत द्वारा किसी भी प्रकार का अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) अथवा निर्माण की अनुमति जारी नहीं की गई है।*
*ग्राम पंचायत ने लिखित पत्र के माध्यम से सागर कलेक्टर प्रतिभा पाल अनुविभागीय अधिकारी राजस्व मुख्य कार्यपालन अधिकारी देवरी को भेजा पत्र अवैध इन कालोनियों पर कार्रवाई की मांग*
*विशेष खबर संवाददाता सतीष सेन*
*मोबाइल नंबर 9752739060*
देवरी कला, सागर। देवरी क्षेत्र में कथित अवैध कॉलोनियों का मामला अब केवल जमीन की खरीद-फरोख्त तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही, विभागीय कार्यप्रणाली और शासन को होने वाले करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान का गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है। ग्राम पंचायत सिलारी द्वारा जारी आधिकारिक पत्र ने पूरे मामले में नया मोड़ ला दिया है। पंचायत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि बैदेही नगर कॉलोनी एवं इंदिरा परिसर कॉलोनी के लिए ग्राम पंचायत द्वारा किसी भी प्रकार का अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) अथवा निर्माण की अनुमति जारी नहीं की गई है।
पंचायत के इस खुलासे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि जब कॉलोनियों के पास वैधानिक स्वीकृति ही नहीं थी, तब उनका निर्माण किसके संरक्षण में हुआ और आखिर प्रशासनिक अमला अब तक मौन क्यों रहा?
बिना अनुमति कॉलोनियां, फिर भी बिजली विभाग ने दे दी सुविधा
मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि देवरी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत झुनकू में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के पीछे, पोस्टमार्टम हाउस के सामने विकसित की गई कथित अवैध कॉलोनी में बिजली विभाग द्वारा दो ट्रांसफार्मर, विद्युत पोल, केबल और बिजली आपूर्ति तक शुरू कर दी गई।
यदि संबंधित कॉलोनी के पास पंचायत की एनओसी और वैधानिक स्वीकृतियां नहीं थीं, तो बिजली विभाग ने आखिर किन दस्तावेजों के आधार पर विद्युत अधोसंरचना स्थापित की? क्या नियमानुसार जांच की गई थी, या फिर नियमों को नजरअंदाज कर सुविधाएं उपलब्ध करा दी गईं? यह सवाल अब सीधे बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर खड़े हो रहे हैं।
पंचायत ने प्रशासन को लिखा पत्र, मांगी सख्त कार्रवाई
ग्राम पंचायत सिलारी की सरपंच सविता दिनेश लोधी एवं सचिव दिनेश पाराशर ने इस मामले को गंभीर मानते हुए ग्राम पंचायत ने लिखित में कलेक्टर प्रतिभा पाल, एसडीएम मुनव्वर खान तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत देवरी को पत्र भेजकर अवैध कॉलोनियों की जांच और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।
पंचायत द्वारा जारी पत्र में उल्लेख है कि 14 जुलाई 2026 को समाचार प्रकाशित होने के बाद मामला पंचायत के संज्ञान में आया। जांच में स्पष्ट हुआ कि संबंधित कॉलोनियों के लिए पंचायत से कोई अनुमति या एनओसी जारी नहीं की गई है। इसके बावजूद कॉलोनियों का निर्माण और प्लॉटों की बिक्री जारी रही, जो शासन के नियमों के विपरीत है।
महंगे दामों में बिक रहे प्लॉट, सुविधाएं नदारद
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बैदेही नगर कॉलोनी और इंदिरा परिसर कॉलोनी में लोगों को लाखों रुपये लेकर प्लॉट बेचे जा रहे हैं। कॉलोनाइजरों द्वारा सड़क, नाली, बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
बताया जा रहा है कि बैदेही नगर कॉलोनी में आज भी न तो समुचित नालियां हैं और न ही व्यवस्थित बिजली व्यवस्था उपलब्ध है। ऐसे में लोगों से सुविधाओं के नाम पर राशि लेने पर भी सवाल उठ रहे हैं।
एक ही कॉलोनाइजर, कई नामों से कॉलोनियां!
देवरी नगर एवं आसपास के क्षेत्रों में एक ही कॉलोनाइजर द्वारा अलग-अलग नामों से कई कॉलोनियां विकसित किए जाने की चर्चा है। यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है तो यह पूरे नेटवर्क की जांच का विषय बन सकता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बिना वैधानिक स्वीकृति के कॉलोनियां काटकर शासन के नियमों को खुली चुनौती दी जा रही है।
शासन को करोड़ों के राजस्व का नुकसान?
विशेषज्ञों का मानना है कि वैध कॉलोनी विकसित करने के लिए विभिन्न विभागों से अनुमति, विकास शुल्क, कर एवं अन्य वैधानिक शुल्क जमा करना पड़ता है। यदि बिना अनुमति कॉलोनियां विकसित की जाती हैं तो शासन को मिलने वाला राजस्व प्रभावित होता है। ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच से ही स्पष्ट होगा कि शासन को कितना आर्थिक नुकसान हुआ है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
अब उठ रहे हैं बड़े सवाल
जब ग्राम पंचायत ने एनओसी जारी ही नहीं की, तो कॉलोनियों का निर्माण किस आधार पर हुआ?
बिजली विभाग ने बिना वैधानिक स्वीकृति के ट्रांसफार्मर, पोल और बिजली आपूर्ति किस आधार पर शुरू की?
क्या अन्य विभागों ने भी नियमों की अनदेखी कर सुविधाएं उपलब्ध कराईं?
बिना अनुमति प्लॉट बेचकर लोगों से लाखों रुपये वसूलने वालों पर कार्रवाई कब होगी?
शासन को हुए संभावित राजस्व नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
अब पूरा मामला जिला प्रशासन के सामने है। लोगों की निगाहें कलेक्टर, राजस्व विभाग और जनपद पंचायत की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जांच निष्पक्ष होती है तो अवैध कॉलोनियों के साथ-साथ उनसे जुड़े सभी जिम्मेदार व्यक्तियों और संबंधित विभागों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
इनका कहना है
> "मेरी ग्राम पंचायत ने स्पष्ट किया है कि बैदेही नगर कॉलोनी एवं इंदिरा परिसर कॉलोनी के लिए ग्राम पंचायत द्वारा किसी भी प्रकार का अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी नहीं किया गया है। न ही मेरे द्वारा कॉलोनी विकसित करने की कोई अनुमति दी गई है। इस संबंध में कलेक्टर सागर, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) देवरी तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत देवरी को पत्र भेजकर अवैध कॉलोनियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।"
— दिनेश पाराशर, सचिव, ग्राम पंचायत सिलारी
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