देव पूर्णिमा पर निकली भव्य शोभा यात्रा: भगवान जगन्नाथ स्वामी के महाअभिषेक का आयोजन

बीना (सागर): देव स्नान पूर्णिमा के अवसर पर राधे राधे प्रभात मंडल द्वारा एक भव्य शोभा यात्रा का आयोजन किया गया, जो मां जागेश्वरी धाम से प्रारंभ होकर नगर भ्रमण करते हुए, हरे राम मंदिर पर समाप्त हुई। इस विशेष अवसर पर भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा का कलशों के पवित्र जल से पारंपरिक महाअभिषेक किया गया।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस महास्नान के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं, जिसके साथ ही अनवसर (अनसार) काल की शुरुआत होती है। इस अवधि में भगवान के विश्राम और विशेष सेवा का आयोजन होता है।

अनवसर काल की परंपराएं

  • भगवान को अत्यधिक स्नान के कारण ज्वर आने की मान्यता है, जिसके चलते वे लगभग 15 दिनों तक विश्राम करते हैं।
  • इस अवधि में श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के कपाट बंद रहते हैं, और केवल सेवायत ही भगवान की गोपनीय सेवा करते हैं।
  • भगवान को आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों, काढ़ा, फल और हल्का भोग अर्पित किया जाता है।

भक्त प्रत्यक्ष दर्शन नहीं कर पाते, लेकिन भगवान के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए पूजा-अर्चना जारी रखते हैं।

नवयौवन दर्शन: 16 जुलाई

विश्राम अवधि पूरी होने के बाद 16 जुलाई को भगवान नवयौवन स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं, जिसे नवयौवन दर्शन या नेत्रोत्सव कहा जाता है। इसके अगले दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा भव्य रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं।

जगन्नाथ स्वामी रथ यात्रा के सदस्य एडवोकेट प्रभात व्यास ने बताया कि यह यात्रा हरे राम मंदिर स्थित भगवान जगन्नाथ स्वामी मंदिर से प्रारंभ होगी। यात्रा नानक वार्ड से पंचमुखी हनुमान होते हुए नगर भ्रमण करेगी, जिसमें नगर के सभी श्रद्धालु गण दर्शन लाभ लेंगे। यात्रा उस रात स्टेशन रोड स्थित हनुमान मंदिर पर विश्राम करेगी और सुबह ढोल नगाड़ों के साथ पुनः हरे राम मंदिर स्थित जगन्नाथ स्वामी मंदिर पर विराजमान होगी।