*17 अगस्त को देशव्यापी आंदोलन: 11 सूत्रीय मांगों को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपेगा आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका संघ*

​आलीराजपुर। भारतीय मजदूर संघ (BMS) से संबद्ध सभी संगठनों द्वारा आगामी 17 अगस्त को देशव्यापी आंदोलन के तहत प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जाएगा। आलीराजपुर जिले में इस आंदोलन का नेतृत्व आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका संघ अपनी 11 सूत्रीय प्रमुख मांगों को लेकर करेगा, मांग :- 1.आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
2.कार्यकर्ता को न्यूनतम ₹30,000 प्रतिमाह तथा सहायिका को ₹20,000 प्रतिमाह वेतन/मानदेय दिया जाए।
3.महंगाई भत्ता (DA), पेंशन, चिकित्सा सुविधा सहित सामाजिक सुरक्षा का लाभ दिया जाए।
4.सेवानिवृत्ति पर कार्यकर्ता एवं सहायिका को ₹10 लाख की एकमुश्त राशि दी जाए।
5.ESIC, EPF एवं ग्रेच्युटी जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं लागू की जाएं।
6.मानदेय/वेतन का भुगतान हर माह समय पर किया जाए तथा पुराने बकाया का तत्काल भुगतान हो।
7.सहायिका से कार्यकर्ता पद पर पदोन्नति में अनुभव एवं योग्यता का उचित लाभ दिया जाए।
8.कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को मातृत्व अवकाश एवं अन्य आवश्यक अवकाश का लाभ दिया जाए।
9.समान काम के लिए समान वेतन का सिद्धांत लागू किया जाए।
10.आंगनवाड़ी कर्मचारियों से ICDS के अतिरिक्त गैर-विभागीय कार्य न करवाए जाएं।
11.आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए पर्याप्त भवन, पोषण सामग्री, उपकरण एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं।
जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के जुटने की संभावना है।
​'हर योजना धरातल पर पहुँचाने के बाद भी सौतेला व्यवहार'
​आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका संघ की प्रदेश उपाध्यक्ष मंजुला लोहार ने सरकार की नीतियों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ही वह धरातली कड़ी हैं, जो कठिन परिस्थितियों में भी सरकार की हर जनकल्याणकारी योजना को आम जन तक पहुँचाती हैं।
​उन्होंने कहा, "विभाग के गठन से लेकर आज तक कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन किसी ने भी हमारी नियमावली बदलकर हमें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की कोशिश नहीं की। बड़े मंचों से महिलाओं के आत्मनिर्भरता की बातें तो की जाती हैं, लेकिन वर्षों से हमें केवल मामूली मानदेय पर ही रखा गया है। हम पूरा समय केंद्र पर महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य, कुपोषण मिटाने तथा मातृ-शिशु मृत्यु दर कम करने में बिता देती हैं, लेकिन सरकार को हमारे अपने बच्चों के भविष्य की कोई चिंता नहीं है।"
​सुविधाओं का अभाव और अधिकारियों का दबाव
​आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका संघ की जिलाध्यक्ष कमला रावत ने जिले की वास्तविक समस्याओं को रेखांकित करते हुए कहा कि निरीक्षण पर आने वाले अधिकारी केवल कमियां निकालते हैं और कार्यवाही की धमकी देकर दबाव बनाते हैं। वे यह नहीं देखते कि केंद्रों पर स्वच्छ पेयजल, पंखे, स्टेशनरी या बैठने की उचित व्यवस्था है या नहीं। कई कार्यकर्ता अपने जेब से पैसे खर्च कर मीटिंग और स्टेशनरी का खर्च उठा रही हैं।
​आलीराजपुर के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण नेटवर्क की समस्या और ग्रामीणों के अन्य राज्यों में पलायन से काम में कई व्यावहारिक चुनौतियाँ आती हैं, जिन्हें अधिकारी सुनने को तैयार नहीं हैं।

​स्व सहायता समूह (सांझा चूल्हा) भी संकट में
​इस आंदोलन में भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध स्व सहायता समूह (सांझा चूल्हा) की महिलाएँ भी शामिल होंगी, जो केंद्रों पर नाश्ता और भोजन उपलब्ध कराती हैं। उन्होंने बताया कि 4 से 6 महीने तक उन्हें खाद्यान्न और बजट की राशि नहीं मिलती। बढ़ती महंगाई में कम राशि मिलने के कारण मीनू के अनुसार भोजन देना बेहद कठिन हो गया है।
​"एकता में ही ताकत है":

भारतीय मजदूर संघ
​भारतीय मजदूर संघ के जिला मंत्री धनसिंह कनेश ने जिले के सभी संबद्ध संगठनों से इस धरना प्रदर्शन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का आह्वान किया है। उन्होंने नारा देते हुए कहा, "हम अपना अधिकार मांगते, न किसी से भीख मांगते। संगठित रहो, आवाज उठाओ, एकता में ही ताकत है और एक दिन सफलता जरूर मिलेगी।"




धनसिंह कनेश
जिलामंत्री भारतीय मजदूर संघ