मुख्यमंत्री के दौरे के 24 घंटे भी नहीं बीते, जिला अस्पताल की व्यवस्था फिर सवालों में

कल चाक-चौबंद नजर आई व्यवस्था, आज इलाज के लिए परेशान महिला रोती दिखी; मरीजों के परिजनों को बॉटल स्टैंड तक के लिए जूझना पड़ने की शिकायत

टीकमगढ़। जिला अस्पताल टीकमगढ़ की व्यवस्थाओं को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के टीकमगढ़ दौरे के दौरान अस्पताल और शहर की व्यवस्थाएं बेहतर नजर आईं, लेकिन मुख्यमंत्री के दौरे के 24 घंटे भी पूरे नहीं हुए कि जिला अस्पताल की एक तस्वीर ने व्यवस्थाओं को लेकर फिर सवाल खड़े कर दिए। अस्पताल परिसर में इलाज के लिए परेशान एक महिला के रोने का मामला सामने आया है। इस स्थिति को देखकर अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर एक बार फिर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

जिला अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों की परेशानियों का यह कोई पहला मामला नहीं है। पूर्व में भी ऐसी तस्वीरें सामने आती रही हैं, जब मरीज को ड्रिप या दवा की बोतल लगाए जाने के बाद उसे टांगने के लिए बॉटल स्टैंड उपलब्ध नहीं होने पर परिजनों को काफी देर तक हाथ में ही बोतल पकड़कर खड़ा रहना पड़ा। मरीज की बीमारी के साथ ऐसी छोटी-छोटी व्यवस्थागत परेशानियां परिजनों की मुश्किलें और बढ़ा देती हैं।

कल मुख्यमंत्री थे तो व्यवस्था दुरुस्त, आज फिर वही सवाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के टीकमगढ़ आगमन के दौरान प्रशासनिक स्तर पर व्यवस्थाओं को लेकर विशेष सतर्कता दिखाई गई। अस्पताल सहित विभिन्न स्थानों पर व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के प्रयास किए गए। लेकिन अब मुख्यमंत्री के दौरे के अगले ही दिन सामने आई तस्वीरों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या व्यवस्थाएं केवल वीआईपी दौरे के दौरान ही बेहतर दिखाई देती हैं?

अस्पताल में इलाज कराने आने वाला आम मरीज रोजाना इसी व्यवस्था का सामना करता है। उसके लिए कोई विशेष दौरा या निरीक्षण नहीं होता। ऐसे में जरूरी है कि जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं किसी खास दिन या किसी बड़े अधिकारी के दौरे तक सीमित न रहें, बल्कि हर दिन मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों।

इलाज के लिए परेशान महिला की तस्वीर ने उठाए सवाल

आज जिला अस्पताल में इलाज के लिए पहुंची एक महिला के परेशान होकर रोने की तस्वीर सामने आने के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि महिला की बीमारी और उसके इलाज से संबंधित पूरी स्थिति अस्पताल प्रबंधन की ओर से स्पष्ट किया जाना बाकी है, लेकिन मरीज का इस तरह परेशान होना निश्चित रूप से गंभीर विषय है।

मरीज और उनके परिजनों के लिए अस्पताल केवल भवन और मशीनों का नाम नहीं, बल्कि वह स्थान है जहां वे उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। ऐसे में यदि उपचार के दौरान उन्हें आवश्यक सुविधाओं या सहायता के लिए भटकना पड़े तो व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

दिखावे से आगे बढ़कर स्थायी व्यवस्था की जरूरत

मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान व्यवस्थाओं का बेहतर दिखाई देना निश्चित रूप से अच्छी बात है, लेकिन असली परीक्षा उस समय होती है जब कोई आम नागरिक बिना किसी वीआईपी दौरे के अस्पताल पहुंचता है। सवाल यह नहीं कि मुख्यमंत्री के सामने व्यवस्था कैसी दिखाई दी, सवाल यह है कि मुख्यमंत्री के जाने के बाद आम मरीज को कैसी व्यवस्था मिल रही है?

जिला अस्पताल में यदि बॉटल स्टैंड जैसी बुनियादी सुविधा की कमी है, मरीजों को इलाज के दौरान परेशानी होती है या परिजन सहायता के लिए भटकते हैं तो अस्पताल प्रबंधन को इसकी तत्काल समीक्षा करनी चाहिए। स्वास्थ्य सेवाओं में व्यवस्था का स्तर किसी एक दिन के निरीक्षण से नहीं, बल्कि रोजाना मरीज को मिलने वाली सुविधा से तय होता है।

अब जरूरत इस बात की है कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं का वास्तविक निरीक्षण करें और मरीजों की शिकायतों को मौके पर सुनकर उनका समाधान कराएं। मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान व्यवस्था चाक-चौबंद दिखे और अगले ही दिन आम मरीज परेशान मिले, तो सवाल उठना लाजिमी है—क्या व्यवस्था सिर्फ दिखावे के लिए थी या अब स्थायी सुधार भी दिखाई देगा?