कोतमा। जल ही जीवन है, लेकिन जब जीवन देने वाली नदी की धारा को औद्योगिक हितों के लिए बांध दिया जाए, तो जनआक्रोश का पनपना स्वाभाविक है। अनूपपुर जिले के कोतमा क्षेत्र की जीवनदायिनी मानी जाने वाली केवई नदी इन दिनों अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। अनूपपुर सुपर थर्मल पॉवर प्लांट द्वारा नदी पर बनाए गए बैराज (एनीकट) को लेकर क्षेत्र के युवाओं ने अब आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है।
युवाओं ने खोला मोर्चा: "आज नहीं जागे, तो प्यासा मरेगा भविष्य"
स्थानीय सजग युवाओं ने इस मुद्दे को केवल एक निर्माण कार्य न मानकर, इसे आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर हमला करार दिया है। युवा नेता अनुज गौतम के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) को ज्ञापन सौंपकर अपनी चिंताओं से अवगत कराया।
युवाओं का तर्क है कि:
* प्रवाह में अवरोध: बैराज के कारण नदी की स्वाभाविक जलधारा रुक गई है, जिससे नदी का पारिस्थितिक तंत्र बिगड़ रहा है।
* पेयजल संकट: कोतमा नगर की पूरी जल प्रदाय व्यवस्था केवई नदी पर टिकी है। यदि मुख्य धारा रोकी गई, तो भीषण गर्मी में नगर में त्राहि-त्राहि मच जाएगी।
* अस्तित्व का खतरा: यह केवल पानी की किल्लत नहीं, बल्कि एक पूरी सभ्यता और पर्यावरण के विनाश की पदचाप है।
पिछली घटना से सबक: जब मशीनें बुलानी पड़ीं
गौरतलब है कि हाल ही में बैराज के कारण नदी का बहाव पूरी तरह ठप हो गया था, जिससे ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। भारी विरोध और आंदोलन के दबाव में कंपनी प्रबंधन को झुकना पड़ा और पोकलेन मशीन के जरिए बैराज के अवरोध हटाकर पानी की धारा को बहाल करना पड़ा। इस घटना ने युवाओं की आशंकाओं को पुख्ता कर दिया है कि कंपनी का प्रबंधन भविष्य में जल सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है।
प्रशासन से ठोस कदम उठाने की मांग
ज्ञापन के माध्यम से नगर पालिका प्रशासन से मांग की गई है कि वे केवल मूकदर्शक न बनें, बल्कि:
* तत्काल संबंधित विभागों और उच्चाधिकारियों को इस गंभीर समस्या से लिखित में अवगत कराएं।
* थर्मल पॉवर प्लांट के प्रबंधन के साथ इस विषय पर स्थायी समाधान के लिए वार्ता करें।
* यह सुनिश्चित किया जाए कि औद्योगिक लाभ के लिए आम जनता के हक का पानी न छीना जाए।
हम विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास की कीमत पर अपने नगर को प्यासा मरते नहीं देख सकते। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह आक्रोश एक विशाल जनआंदोलन में तब्दील होगा।" - अनुज गौतम, युवा नेता
आंदोलन में शामिल प्रमुख नाम
नगर के भविष्य को सुरक्षित रखने की इस मुहिम में अनुज गौतम के साथ अरुण लखेरा, तरुण यादव, आकाश समुद्रे, सुजल समुद्रे, गुड्डू प्रजापति, अमन श्रीवास, और निहाल समुद्रे सहित बड़ी संख्या में स्थानीय युवा शामिल हैं।
: केवई नदी पर बना यह बैराज अब कोतमा के लिए 'खतरे की घंटी' बन चुका है। अब गेंद प्रशासन के पाले में है कि वह एक निजी कंपनी के हितों को प्राथमिकता देता है या हजारों नागरिकों की प्यास बुझाने वाली नदी के अस्तित्व को।

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