, रसूखदारों को मिला 'अभयदान
अनूपपुर।अनूपपुर जिले के कोतमा नगर पालिका क्षेत्र के अंतर्गत वार्ड क्रमांक-05 में 'अग्रवाल लॉज' के धराशायी होने के दर्दनाक हादसे में प्रशासन ने पहली बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। कलेक्टर हर्षल पंचोली ने पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरतने के आरोप में दो कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। हालांकि, इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है कि प्रशासन ने केवल छोटे मोहरों पर कार्रवाई कर मुख्य जिम्मेदारों को सुरक्षित बचा लिया है।

क्या है निलंबन आदेश में?
कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के अनुसार, दिनांक 04 अप्रैल 2026 को बस स्टैंड के पास स्थित तीन मंजिला अग्रवाल लॉज अचानक गिर गया था, जिसके मलबे में दबने से तीन लोगों (रामकृपाल यादव, हनुमानदीन यादव और राधा कोल) की असामयिक मृत्यु हो गई और तीन अन्य घायल हुए। जांच में सामने आया कि इमारत के पास बेसमेंट के लिए अवैध रूप से लगभग 15 दिनों से गहरा गड्ढा खुदा हुआ था, जिस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

निलंबित किए गए अधिकारी:
 वंदना अवस्थी उपयंत्री इन्हें निकाय में 'भवन अधिकारी'  के रूप में नामित किया गया था। आदेश में स्पष्ट है कि म०प्र० भूमि विकास नियम, 2012 के तहत अवैध निर्माण रोकना इनकी जिम्मेदारी थी, जिसमें ये विफल रहीं।
  वही योगेन्द्रनाथ तिवारी सहायक राजस्व निरीक्षक ये 'भवन निरीक्षक' के रूप में कार्य कर रहे थे। इन पर भी अवैध खनन और निर्माण कार्य का निरीक्षण न करने तथा उसे न रोकने के कारण अनुशासनहीनता और कदाचार की कार्रवाई की गई है।दोनों ही कर्मचारियों का मुख्यालय अब जिला शहरी विकास अभिकरण अनूपपुर नियत किया गया है।

सवालों के घेरे में 'अभयदान': मुख्य जिम्मेदारों पर खामोशी क्यों?
प्रशासनिक गलियारों और जनचर्चाओं में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या केवल एक उपयंत्री और सहायक राजस्व निरीक्षक ही इस बड़े हादसे के लिए दोषी हैं? नगर पालिका परिषद कोतमा के अध्यक्ष अजय सराफ और मुख्य नगर पालिका अधिकारी  प्रदीप झरिया के संरक्षण या उनकी जानकारी के बिना शहर के मुख्य हिस्से में 15 दिनों तक इतना बड़ा अवैध उत्खनन कैसे चलता रहा? निकाय के शीर्ष नेतृत्व होने के नाते शहर की सुरक्षा की अंतिम जिम्मेदारी इन्हीं की है, किंतु वर्तमान कार्रवाई में इन्हें पूरी तरह 'अभयदान' मिलता दिख रहा है।

 वार्ड प्रभारी की अनदेखी:
वार्ड क्रमांक 09 (जिसके तहत प्रभावित क्षेत्र आता है) के प्रभारी उपयंत्री उमेश त्रिपाठी पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब निर्माण कार्य चल रहा था, तब वार्ड प्रभारी की भूमिका संदिग्ध थी, फिर भी गाज केवल वंदना अवस्थी और योगेन्द्रनाथ तिवारी पर ही क्यों गिरी?

अग्रवाल लॉज हादसे ने तीन परिवारों को उम्र भर का जख्म दे दिया है। कलेक्टर हर्षल पंचोली की इस त्वरित कार्रवाई ने यह तो स्पष्ट कर दिया है कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, लेकिन क्या यह न्यायपूर्ण है? जब तक नगर पालिका के शीर्ष पदों पर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक ऐसी कार्रवाइयां केवल 'खानापूर्ति' ही नजर आती हैं।
पीड़ित परिवार और स्थानीय जनता अब यह देख रही है कि क्या प्रशासन आगे बढ़कर असली 'गुनाहगारों' पर भी शिकंजा कसेगा या छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाकर मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा।