कट्ठीवाड़ा। वनांचल की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली महुआ फसल इस वर्ष गंभीर संकट से गुजर रही है। शुरुआती आकलनों के अनुसार, इस बार महुआ का उत्पादन आधे से भी कम रहने की संभावना है। मौसम में अचानक आए बदलाव—विशेषकर तेज गर्मी और बादलों के असर—ने महुआ के फूलों को समय से पहले मुरझा दिया, जिससे पैदावार पर सीधा असर पड़ा है।
30–40% उत्पादन का अनुमान
मार्च की शुरुआत में अचानक तापमान बढ़ने और बादलों के छा जाने से महुआ के फूल खराब हो गए। स्थानीय जानकारों के अनुसार, इस वर्ष उत्पादन केवल 30 से 40 प्रतिशत तक ही सीमित रहने का अनुमान है, जो सामान्य वर्षों की तुलना में काफी कम है।
स्टॉक की कमी से बढ़ेगी मांग
व्यापारिक सूत्रों का कहना है कि इस वर्ष स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण इसलिए है क्योंकि पिछले साल का स्टॉक लगभग खत्म हो चुका है। न तो कोल्ड स्टोरेज में पर्याप्त भंडारण है और न ही स्थानीय व्यापारियों के पास पुराना माल बचा है। ऐसे में कम उत्पादन के बावजूद महुआ की मांग बनी रहने की संभावना है, जिससे इसके भावों में उछाल आ सकता है।
पिछले वर्ष महुआ का थोक भाव करीब ₹65 प्रति किलो तक पहुंच गया था, जबकि रिटेल में यह ₹45–50 प्रति किलो के बीच बिका था।
क्षेत्रवार उत्पादन की स्थिति
ग्रामीणों के अनुसार, गुजरात सीमा से लगे इलाकों में महुआ उत्पादन असमान है।
काछला और घुट क्षेत्र में उत्पादन अपेक्षाकृत अच्छा बताया जा रहा है
वहीं वाव करा और ध्याना क्षेत्र में मध्यम पैदावार का अनुमान है
तीन तरह के टैक्स से व्यापारी परेशान
महुआ व्यापारियों को इस बार केवल उत्पादन की कमी ही नहीं, बल्कि कर व्यवस्था की जटिलता का भी सामना करना पड़ रहा है। मध्यप्रदेश में महुआ पर
जीएसटी,
मंडी टैक्स,
और वन विभाग का शुल्क
तीनों अलग-अलग स्तर पर लागू होते हैं। इन करों के लिए अलग-अलग प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है, जिससे व्यापारियों को काफी परेशानी होती है और स्थानीय व्यापार प्रभावित होता है।
इसके विपरीत, पड़ोसी गुजरात राज्य में महुआ पर केवल जीएसटी लागू है, जिससे वहां व्यापार अपेक्षाकृत आसान और सुगम माना जाता है।
निष्कर्ष
इस वर्ष महुआ उत्पादन में भारी गिरावट, स्टॉक की कमी और जटिल कर व्यवस्था—तीनों मिलकर बाजार पर असर डाल सकते हैं। आने वाले समय में महुआ के दाम बढ़ने और स्थानीय व्यापार पर दबाव बनने की पूरी संभावना है।

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