मंडला में जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरुआत: संगम घाट से जल संरक्षण का संदेश

मंडला, मध्यप्रदेश: धरती के अस्तित्व को बनाए रखने और भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल स्रोतों को संरक्षित रखने के उद्देश्य से, मध्यप्रदेश में "जल गंगा संवर्धन अभियान" के तीसरे चरण की शुरुआत की गई है। प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर से इस अभियान का शुभारंभ किया। मंडला जिले में इस अभियान की शुरुआत संगम घाट से की गई, जिसमें कई गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री संपत्तिया उइके, नगर पालिका अध्यक्ष विनोद कच्छवाहा, कलेक्टर सोमेश मिश्रा और पुलिस अधीक्षक रजत सकलेचा सहित प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान, जिलेवासियों को यह संदेश दिया गया कि वसुंधरा को बचाए रखने के लिए जल की हर बूंद का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। इसके तहत सूखी नदियों और तालाबों का पुनर्जीवन, पुराने कुओं और बावड़ियों की मरम्मत, और नहरों के निर्माण जैसे अनेक कार्य किए जाएंगे।

कैबिनेट मंत्री संपत्तिया उइके ने कहा, "गुड़ी पड़वा और नववर्ष के पावन अवसर पर, उज्जैन की पवित्र शिप्रा नदी के तट से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा इस महत्वपूर्ण अभियान की शुरुआत की गई। मंडला जिले में भी, मां नर्मदा के तट पर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है।"

मंत्री उइके ने बताया कि मंडला जिले के सभी नौ विकासखंडों में भी जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों द्वारा इस अभियान के अंतर्गत कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री के आह्वान पर बनाए गए अमृत सरोवरों की तरह ही जिले में जल संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रशासन के साथ मिलकर उन स्थानों को चिन्हित किया गया है, जहां नदियों, तालाबों, झरनों और कुओं का पुनर्जीवन किया जा सके। साथ ही, लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए मां नर्मदा के तट पर श्रमदान भी किया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री को इस अभियान के लिए बधाई देते हुए कहा कि गिरते भूजल स्तर को ध्यान में रखते हुए पहले भी 90 दिनों का जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया गया था और अब इसके तीसरे चरण के माध्यम से प्रदेश में जल संरक्षण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

अंत में, जिलेवासियों से अपील की गई कि जल ही जीवन है, इसलिए हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी समझते हुए जल की एक-एक बूंद को बचाने का संकल्प ले।