नादान भगोरिया मेला में उमड़ा जनसैलाब, आदिवासी संस्कृति और परंपराओं की अनूठी झलक
विजय मालवीय
नादान/इछावर।नादान में आयोजित पारंपरिक भगोरिया मेला उत्साह, उल्लास और आदिवासी संस्कृति की रंगीन छटा के साथ धूमधाम से संपन्न हुआ। मेले में आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण, युवक-युवतियां और व्यापारी शामिल हुए, जिससे पूरे क्षेत्र में त्योहार जैसा माहौल देखने को मिला।
भगोरिया मेला आदिवासी अंचल की सदियों पुरानी परंपरा का प्रतीक है, जिसमें युवा पारंपरिक वेशभूषा में ढोल-मांदल की थाप पर नृत्य करते हुए मेले की रौनक बढ़ाते नजर आए। मेले में पारंपरिक आभूषण, खिलौने, झूले, स्थानीय व्यंजन और ग्रामीण बाजार की विशेष दुकानों पर लोगों की भारी भीड़ रही।
युवाओं में भगोरिया मेले को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। रंग-गुलाल, लोकगीत और नृत्य के साथ मेले ने सामाजिक मेल-मिलाप और सांस्कृतिक एकता का संदेश दिया। वहीं बुजुर्गों ने भी इस मेले को अपनी परंपरा और संस्कृति से जुड़ा महत्वपूर्ण उत्सव बताया।
मेले में सुरक्षा व्यवस्था के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिससे आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। स्थानीय प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों ने भी मेले का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
नादान भगोरिया मेला ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि आदिवासी संस्कृति, परंपरा और लोक उत्सव आज भी ग्रामीण जीवन की आत्मा हैं और इन्हें सहेजकर रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।

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