*सहकारी समीती लैम्पस मोहगांव कि व्यवसथांए बदहाल- किसान से लेकर सेल्समैन परेशान- जिम्मेदार कौन*
*मंडला / मोहगांव-* सांथियो आज के इस दौर पर- *देश में दावों और वादों की कोई कमी नहीं है- सरकार कहती हैं कि किसानों की आय दोगुनी करनी है- उन्हें डिजिटल बनाना है और बैंक के चक्कर काटने से बचाना है-* लेकिन- मंडला जिले कि विकासखंड मोहगांव मुख्यालय मोहगांव में संचालित ( लैम्पस जिला सहकारी समीती मर्यादित बैंक ) जमीनी हकीकत क्या है
*लैम्पस मोहगांव के अंतर्गत आने बाले- दर्जनों किसानों का आरोप है कि लैम्पस मोहगांव में नियम- कानून ताक पर रख दिए गए हैं- एक मामूली से काम के लिए- चाहे वो लोन की बात हो- खाद- बीज की एंट्री हो या फिर खातों से जुड़ा कोई काम हो- किसानों को यंहा एक काम कम के लिए कम से कम-10 बार बैंक की चौखट पर आना पड़ता है- कभी लिंक फेल होने का बहाना- कभी अधिकारी की कुर्सी खाली- तो कभी कागजों में कमी निकालकर किसानों को वापस लौटा दिया जाता है*
*ग्रामीण छेत्र के दर्जनों किसानों का कहना है कि- हम सुबह-10 बजे से आकर लाइन में लगते हैं- और दोपहर को बोल दिया जाता है कि आज काम नहीं होगा- सर्वर डाउन है*
हैरानी की बात तो यह है कि- अगर सूत्रों कि मानें तो- मोहगांव लैम्पस के जिम्मेदार कि मनमानी व इस अव्यवस्था से सिर्फ आम किसान ही नहीं- बल्कि लैम्पस के सेल्समैन और कर्मचारी भी बुरी तरह परेशान हैं- जब बैंक की मुख्य कड़ी ही इस कदर चरमरा जाएगी- तो आम जनता को सुविधा कैसे मिलेगा- दूर- दराज के गांवों से बस का किराया फूंककर आने वाले इन गरीब किसानों के समय और पैसे की इस बर्बादी का जिम्मेदार आखिर कौन है
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