कलेक्टर ने जताई नाराजगी
अनूपपुर ।  खांडा रामपुर बटुरा खुली खदान परियोजना से प्रभावित किसानों द्वारा आगामी 16 मार्च 2026 से खदान का कामकाज पूर्णतः ठप करने की चेतावनी दी गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए शहडोल कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने एसईसीएल  सुहागपुर क्षेत्र के धनपुरी गेस्ट हाउस में एक महत्वपूर्ण बैठक ली।

बैठक में प्रशासन और SECL के आला अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में कलेक्टर के साथ बुढार तहसीलदार श्री सुमित गुर्जर उपस्थित रहे। वहीं एसईसीएल प्रबंधन की ओर से सुहागपुर एरिया के महाप्रबंधक श्री बी.के. जेना, बिलासपुर मुख्यालय से आए महाप्रबंधक (राजस्व) श्री बी.के. लाल, और कार्मिक विभाग से श्री चावड़ा सहित विभिन्न विभागों के प्रमुख शामिल हुए।

कलेक्टर ने प्रबंधन को लगाई फटकार
बैठक की शुरुआत में ही कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने रोजगार और मुआवजे के लंबित मामलों को लेकर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने प्रबंधन से सीधे सवाल किया कि जब किसानों की जमीन अधिग्रहित कर ली गई है, तो नौकरी और मुआवजे के भुगतान में इतनी देरी क्यों हो रही है?
उन्होंने सुझाव दिया कि यदि वर्तमान नियमों के कारण किसानों को परेशानी हो रही है, तो बोर्ड स्तर पर कानूनों में संशोधन किया जाना चाहिए। कलेक्टर ने यहाँ तक कहा कि बिलासपुर में होने वाली बोर्ड की बैठक में उन्हें भी आमंत्रित किया जाए, ताकि वे किसानों के हित में ठोस प्रस्ताव रख सकें। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि अधिग्रहित गांवों के मकानों और भूमि का मुआवजा अति शीघ्र वितरित किया जाए।

किसानों ने "गोलमोल" रिपोर्ट का किया विरोध
सामाजिक कार्यकर्ता और कृषक भूपेश शर्मा ने प्रबंधन द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट को पूरी तरह भ्रामक और "गोलमोल" बताया। उन्होंने कलेक्टर के सामने प्रबंधन को आगाह किया कि वे प्रशासन को गुमराह न करें। किसानों ने साफ कर दिया कि यदि न्यायसंगत समाधान नहीं निकला, तो 16 मार्च से खदान बंद करने का फैसला अटल है।
बैठक में ये रहे उपस्थित 
बैठक में जिला पंचायत सदस्य  शांति मनमोहन चौधरी, सांसद प्रतिनिधि राजकमल मिश्रा, किसान नेता आदित्य त्रिपाठी, पत्रकार ओमप्रकाश द्विवेदी, जनपद सदस्य चंद्रकुमार तिवारी सहित कई ग्राम पंचायतों (बिछिया, खमरोध, खैरबना, बैरिया, पड़रिया, गिरवा, देवरी, हर्रीडीह, मालया, खाड़ा, बकेली और बटुरा) के सरपंच एवं उपसरपंच मौजूद रहे।

जनप्रतिनिधियों का कड़ा रुख
 रमेश सिंह (पूर्व जिला अध्यक्ष एवं पूर्व एसडीएम): उन्होंने बैठक के नतीजों पर असंतोष जाहिर करते हुए कहा कि "लीपा-पोती" से काम नहीं चलेगा। इस बैठक से केवल सामान्य ज्ञान बढ़ा है, समाधान नहीं निकला। हम कल सुबह बैठक कर आगे की रणनीति तय करेंगे।
शांति मनमोहन चौधरी (जिला पंचायत सदस्य): उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा कि क्षेत्र के हक की लड़ाई नहीं रुकेगी। 16 तारीख से संपूर्ण खदान बंद रहेगी।

कलेक्टर ने आश्वासन दिया है कि वे अब सप्ताह में एक दिन अधिग्रहण से प्रभावित प्रत्येक गांव की अलग-अलग समीक्षा बैठक करेंगे। हालांकि, किसान अपनी मांगों पर अडिग हैं और अगला पड़ाव रामपुर बटुरा ग्राम पंचायत में होने वाली किसानों की महाबैठक होगी।