टीकमगढ़। नगर पालिका की संपत्तियों पर वर्षों से जमे अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ मंगलवार को जिला प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए 55 दुकानों को सील कर अपने कब्जे में ले लिया। संयुक्त टीम ने कई स्थानों पर ताले कटर से काटकर दुकानें खाली कराईं, अंदर रखा सामान बाहर निकलवाया और दुकानों को सील कर नोटिस चस्पा किए। कार्रवाई के दौरान पूरे क्षेत्र में प्रशासनिक सख्ती देखने को मिली।

यह कार्रवाई कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय के निर्देश पर की गई। हाल ही में आयोजित समय-सीमा (टीएल) बैठक में नगर पालिका की दर्जनों दुकानों पर वर्षों से अवैध कब्जे का मामला सामने आया था। इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता मानते हुए कलेक्टर ने नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी ओमपाल सिंह भदौरिया एवं प्रभारी अध्यक्ष डिप्टी कलेक्टर अंजली शर्मा को तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।

निर्देशों के पालन में एसडीएम संस्कृति लिटोरिया, तहसीलदार सत्येंद्र सिंह गुर्जर, एसडीओपी राहुल कटरे, नगर पालिका और राजस्व अमले की संयुक्त टीम ने कलेक्ट्रेट के सामने स्थित दुकानों, मां कर्मा बाई मार्केट, पुरानी तहसील परिसर सहित विभिन्न स्थानों पर एक साथ अभियान चलाया। प्रशासनिक टीम के पहुंचते ही कई स्थानों पर हलचल मच गई। जिन दुकानों पर कब्जाधारी मौजूद नहीं मिले, वहां ताले काटकर कार्रवाई की गई और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई।

कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने स्पष्ट किया कि नगर पालिका की संपत्तियों पर अवैध कब्जे के कारण न केवल सरकारी राजस्व को लगातार नुकसान हो रहा था, बल्कि पात्र लोगों को दुकानों का वैधानिक आवंटन भी नहीं हो पा रहा था। अब सभी 55 दुकानों को खाली कराकर नियमानुसार नई आवंटन प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी, जिससे नगर पालिका की आय में वृद्धि होगी और पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी।

प्रशासन ने यह भी साफ कर दिया है कि कार्रवाई केवल दुकानों को खाली कराने तक सीमित नहीं रहेगी। जिन लोगों ने वर्षों तक नगर पालिका की संपत्ति पर अवैध कब्जा बनाए रखा, उनसे पूरे कब्जा अवधि का हिसाब लगाकर राजस्व की वसूली भी की जाएगी। इस संबंध में नगर पालिका को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

इस कार्रवाई के बाद शहर में नगर पालिका की अन्य दुकानों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अभी भी कई दुकानें ऐसी हैं जिनका आवंटन किसी अन्य व्यक्ति के नाम है, जबकि उनका संचालन किरायेदारों द्वारा किया जा रहा है। इसके अलावा कई आवंटनों में शासन की गाइडलाइन का पालन नहीं किए जाने के आरोप भी सामने आ रहे हैं। नागरिकों ने प्रशासन से ऐसे मामलों की भी निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की है।

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि नगर पालिका की संपत्तियों पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा या नियम विरुद्ध उपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आगामी दिनों में भी ऐसे मामलों की जांच जारी रहेगी और जहां भी अनियमितताएं मिलेंगी, वहां इसी प्रकार की सख्त कार्रवाई की जाएगी।