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UGC के नए 'इक्विटी' नियमों के खिलाफ केसली में फूटा गुस्सा; राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन

January 30, 2026 01:51 PM 1 min read 48 views
UGC के नए 'इक्विटी' नियमों के खिलाफ केसली में फूटा गुस्सा; राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन
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केसली (सागर)- विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा हाल ही में जारी किए गए 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस' विनियम, 2026 के विरोध की लहर अब तहसील मुख्यालय केसली तक पहुँच गई है। स्थानीय युवाओं, छात्र संगठनों और सर्व समाज के प्रतिनिधियों ने इस कानून को "विभाजनकारी" बताते हुए जनपद परिसर में जमकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने महामहिम राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन थाना प्रभारी केसली को सौंपा।

क्या है विरोध का मुख्य कारण?

आक्रोशित लोगों का कहना है कि यूजीसी के नए नियम परिसरों में सौहार्द बिगाड़ने वाले हैं। ज्ञापन के माध्यम से निम्नलिखित बिंदुओं पर आपत्ति जताई गई:

* असमान परिभाषा: प्रदर्शनकारियों के अनुसार, नए नियमों में 'भेदभाव' की परिभाषा को सीमित रखा गया है, जिससे सामान्य वर्ग के छात्रों के हितों की अनदेखी हो रही है।

* दुरुपयोग की आशंका: छात्रों का तर्क है कि इन नियमों के स्पष्ट न होने के कारण इनका राजनीतिक या व्यक्तिगत द्वेष के लिए दुरुपयोग हो सकता है।

* कैंपस में बंटवारा: आरोप लगाया गया कि यह नियम छात्रों को जातियों में बांटने का काम करेंगे, जिससे शैक्षणिक माहौल प्रभावित होगा।

थाना प्रभारी को सौंपा ज्ञापन

विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग विवेकानंद चौराहा से जनपद परिसर पहुंचे। वहाँ उन्होंने पुलिस प्रशासन के माध्यम से सरकार तक अपनी बात पहुँचाने के लिए ज्ञापन दिया। ज्ञापन में मांग की गई है कि सरकार इन विवादित नियमों को तत्काल प्रभाव से वापस ले या इनमें आवश्यक संशोधन कर सभी वर्गों के छात्रों को समान सुरक्षा प्रदान करे।

> "हम शिक्षा के मंदिरों में राजनीति और भेदभाव बर्दाश्त नहीं करेंगे। यह कानून समानता के नाम पर असमानता फैला रहा है।" - स्थानीय छात्र प्रतिनिधि

सुप्रीम कोर्ट का रुख और वर्तमान स्थिति

उल्लेखनीय है कि देशभर में हो रहे इन विरोध प्रदर्शनों के बीच हाल ही में उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने भी इन नियमों पर कड़ी टिप्पणी करते हुए इनके क्रियान्वयन पर रोक (Stay) लगा दी है। न्यायालय ने भी माना है कि नियमों की शब्दावली अस्पष्ट है और इसमें सुधार की आवश्यकता है।

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