*जतारा।* शासकीय सिविल अस्पताल जतारा में पदस्थ डॉक्टर द्वारा सरकारी आवास में निजी क्लीनिक संचालित कर मरीजों से अवैध वसूली का सनसनीखेज मामला सामने आया है। अस्पताल सूत्रों और मरीजों ने डॉक्टर संजय कुशवाहा पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार डॉक्टर संजय कुशवाहा ने अस्पताल परिसर में ऑक्सीजन प्लांट के बगल में स्थित शासकीय मकान में निजी क्लीनिक खोल रखा है। आरोप है कि उनके यहां काम करने वाला युवक अंशुल कुशवाहा सरकारी अस्पताल की ओपीडी से ही मरीजों को बहला-फुसलाकर निजी क्लीनिक में ले जाता है।

*ओपीडी से सीधे क्लीनिक में ले जाते हैं मरीज -*

सूत्रों के अनुसार अंशुल कुशवाहा ओपीडी में पर्चा लेकर घूमता है और भोले-भाले मरीजों को यह कहकर क्लीनिक में ले जाता है कि डॉक्टर साहब वहीं देखेंगे। वहां मरीजों से मनमानी फीस, इंजेक्शन और बॉटल के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती है। कई बार तो डॉक्टर संजय कुशवाहा क्लीनिक में मौजूद भी नहीं होते, तब भी अंशुल द्वारा ही मरीजों को देखा जाता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले गरीब मरीजों को इस तरह लूटा जा रहा है। उन्हें मजबूरी में निजी क्लीनिक में हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं, जबकि सरकारी अस्पताल में इलाज मुफ्त होना चाहिए।

*विधायक के निरीक्षण के बाद भी हालत जस की तस -*

उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पूर्व क्षेत्रीय विधायक हरीशंकर खटीक ने स्वयं जतारा अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था और व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बावजूद अस्पताल की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। डॉक्टर की मनमानी और दलालों का बोलबाला अभी भी जारी है।

नागरिकों ने कलेक्टर और CMHO से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी डॉक्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई और सरकारी आवास से अवैध क्लीनिक को तत्काल बंद कराने की मांग की है।