महाशिवरात्रि पर हटा के श्री गौरीशंकर मंदिर में भव्य भजन संध्या का आयोजन

महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर हटा के प्रसिद्ध श्री गौरीशंकर मंदिर परिसर में अतिरुद्र महायज्ञ एवं श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के अंतर्गत भव्य भजन संध्या का आयोजन किया गया। श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न इस कार्यक्रम में "हर-हर महादेव" और "बम-बम भोले" के जयघोष से वातावरण शिवमय हो उठा।

भक्तिमय प्रस्तुतियों ने बांधा समां

दद्दा कला मंच पर कलर्स ग्रुप जबलपुर से आए कलाकारों ने मोहक और हृदयस्पर्शी प्रस्तुतियाँ देकर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। भगवान शिव के दिव्य वेश में प्रस्तुत तांडव एवं शिव नृत्य ने समां बांध दिया, जिससे उपस्थित जनसमूह मंत्रमुग्ध हो उठा।

समारोह का विधिवत शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ समिति प्रमुख कुंवर पुष्पेंद्र सिंह हजारी, हटा विधायक उमादेवी खटीक, जनपद अध्यक्ष गंगाराम पटेल सहित अन्य जनप्रतिनिधियों द्वारा विधिवत पूजन-अर्चन एवं दीप प्रज्ज्वलन से किया गया। श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।

जनप्रतिनिधियों का संबोधन

  • कुंवर पुष्पेंद्र हजारी ने जनता का धन्यवाद देते हुए कहा कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन दलगत राजनीति से ऊपर उठकर होना चाहिए। हटा में बुंदेली मेले का आयोजन भी होना चाहिए जिस सांस्कृतिक कार्यक्रम के मेने नींव रखी जिस पौधों को सिंचित कर कलाकारों ने उसे पेड़ बनाया लेकिन कुछ लोग उसमें हींग रखने का काम कर रहे हैं। ऐसी नकारात्मक सोच का में विरोध करता हूँ। आप सबके सहियोग से बल से उनकी कूटनीति को कुचलने का काम भी करता रहूंगा। उन्होंने मंच से उपस्थित पार्षद एवं प्रतिनधियों से सवाल किया क्या आप लोग बुंदेली मेले का आयोजन कराएंगे जिस पर उपस्थित पार्षदों ने सहमति जताई।
  • हटा  विधायक उमादेवी खटीक ने हटा को "उपकाशी नगर" बनाए जाने की इच्छा व्यक्त की और मुख्यमंत्री से इस पर चर्चा करने का आश्वासन दिया। हटा को हटाकर शहर का नाम उपकाशी रखने प्रयास करूंगी

सुरक्षा व्यवस्था और अनुशासन

कार्यक्रम की गरिमा बनाए रखने हेतु हटा थाना प्रभारी सुधीर बेगी एवं पुलिस बल मुस्तैदी से तैनात रहे। सम्पूर्ण आयोजन श्रद्धा, अनुशासन और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा।

उपसंहार

यह भव्य आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक था, बल्कि सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्रचार-प्रसार का भी महत्वपूर्ण माध्यम बना। ऐसे आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखने का एक प्रयास है।