10 दिवसीय भव्य विष्णु महायज्ञ व सीताराम संकीर्तन,संतों का होगा संगम

 

कृष्ण लीला,कथा प्रवचन और मेले के आकर्षण के साथ धार्मिक व सांस्कृतिक महोत्सव

 

गढ़ाकोटा,- सागर जिले के सागर दमोह रोड स्थित गलगल टोरिया के श्रीजामवंत दादा सिद्धबाबा हनुमान मंदिर परिसर में 21 अप्रैल 2026 से 30 अप्रैल 2026 तक श्री श्री 1008 श्री 51 कुण्डीय श्री विष्णु महायज्ञ एवं श्री सीताराम नाम संकीर्तन का भव्य आयोजन किया जा रहा है। आयोजन समिति के अनुसार यह महायज्ञ विश्व में बढ़ती आतंक, अराजकता और असंतोष की स्थितियों के निवारण तथा रामराज्य की स्थापना की मंगल कामना के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।

समिति ने बताया कि इस विशाल धार्मिक आयोजन में क्षेत्र के ग्रामवासियों का विशेष सहयोग मिल रहा है और श्री हनुमान जी महाराज की कृपा से यह कार्यक्रम भव्य रूप ले रहा है।

 

 कार्यक्रम की प्रमुख तिथियाँ

दिनांक 21 अप्रैल 2026 (मंगलवार): कलश यात्रा के साथ शुभारंभ,22 अप्रैल 2026 (बुधवार): मंडप प्रवेश एवं यज्ञ आरंभ,30 अप्रैल 2026 (गुरुवार): यज्ञ पूर्णाहुति

 

देश-विदेश के संतों का आगमन

 

आयोजन समिति के अनुसार महायज्ञ में देश-विदेश से संत, विद्वान एवं कथावाचक शामिल होंगे। प्रमुख रूप से महंत धर्मेन्द्र दास निमोही जी महाराज (भथा धाम, नेपाल),नेपाली बाबा पुजारी जी महाराज (गलगल टोरिया,स्वामी मुकुंद नारायण आचार्य (वीरगंज, नेपाल)अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम को आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान करेंगे।

 धार्मिकता के साथ सांस्कृतिक रंग

महायज्ञ के दौरान श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण भी रखे गए हैं।वृंदावन से आई मंडली द्वारा प्रतिदिन रात्रि में श्री कृष्ण लीला का मंचन किया जाएगा

अयोध्या और वाराणसी से आए विद्वानों द्वारा वेद मंत्रों एवं धार्मिक कथाओं का प्रवचन होगा मेले में मौत का कुआं,टावर झूला, ब्रेक डांस झूला और जादू शो जैसे मनोरंजन के साधन भी उपलब्ध रहेंगे

 

जनसामान्य के लिए अपील

 

आयोजन समिति ने क्षेत्र के सभी धर्मावलंबियों,माताओं-बहनों और युवाओं से अपील की है कि वे इस पुण्य कार्य में बढ़-चढ़कर भाग लें और तन, मन, धन से सहयोग प्रदान करें,जिससे महायज्ञ सफलतापूर्वक संपन्न हो सके।सामूहिक सहयोग से आयोजन

यह आयोजन रगौली,गिरवर, नयाखेड़ा,धूरा,देवरी,परसोरिया सहित आसपास के सभी ग्रामवासियों एवं क्षेत्रवासियों के सहयोग से किया जा रहा है।

समिति का कहना है कि यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं,बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक परंपरा और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है, जो क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेगा।