गंजबासौदा।* जिस अयोध्या ने 14 वर्षों तक अपने आराध्य श्रीराम की प्रतीक्षा की थी, उसी अयोध्या की प्रतीक्षा, उल्लास और दीपोत्सव की परंपरा को नगर का सुभाष निकेतन विद्यालय पिछले 15 वर्षों से जीवंत रखे हुए है। शहर की मुख्य सड़कों से जब भगवामय शोभायात्रा निकली तो नजारा देखते ही बन रहा था। सिर पर भगवा साफे धारण किए, उल्लास और उमंग से भरे, हर्षित-प्रफुल्लित बच्चे अनुशासित कतारों में कदमताल करते हुए आगे बढ़ रहे थे। उनके साथ भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमानजी के स्वरूप में सजे विद्यार्थी आकर्षण का केंद्र बने हुए थे। किसी के हाथ में धनुष-बाण था तो कोई बजरंगबली के स्वरूप में प्रभु श्रीराम की भक्ति का संदेश दे रहा था। भगवा ध्वजों की लहराती कतारें, बच्चों के चेहरे पर झलकता उत्साह और गूंजते जय श्रीराम के जयकारों ने शहर की सड़कों को मानो अवधपुरी की गलियों में बदल दिया। नगरवासियों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया। विद्यालय संचालक अखिलेश श्रीवास्तव एवं समस्त विद्यालय परिवार ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों, शिक्षकों की मेहनत और अभिभावकों की सहभागिता ने कार्यक्रम को भव्य स्वरूप प्रदान किया।
मालूम हो कि सुभाष निकेतन  हायर सेकेंडरी एवं माय स्कूल परिवार द्वारा भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन के उपलक्ष्य में भव्य दीपावली उत्सव आयोजित किया जाता है। मंगलवार को विद्यालय द्वारा 15 वर्षों से पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाई जा रही रामभक्ति, भारतीय संस्कृति और संस्कारों की जीवंत परंपरा का उत्सव देखने मिला। कार्यक्रम का शुभारंभ सिद्धेश्वरी मंदिर, रेस्ट हाउस से निकली भव्य शोभायात्रा के साथ हुआ। शोभायात्रा में बड़ी संख्या में विद्यार्थी पारंपरिक वेशभूषा और लाल साफे धारण कर शामिल हुए । प्रभु श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान जी और रामायण के विभिन्न पात्रों के स्वरूप में सजे विद्यार्थियों ने पूरे वातावरण को राममय कर दिया। हाथों में भगवा ध्वज लिए विद्यार्थी जब जय श्रीराम के उद्घोष के साथ आगे बढ़े तो नगर की सड़कें भी भक्तिमय उत्साह से सराबोर हो गईं। शोभायात्रा जब विद्यालय परिसर पहुंची तो वहां भी अयोध्या जैसा वातावरण साकार हो उठा। दीपमालाओं से सजा परिसर, फूलों से सुसज्जित राजसिंहासन और रामायण के पात्रों की जीवंत प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों को त्रेतायुग की स्मृतियों में पहुंचा दिया। भरतजी ने प्रभु श्रीराम को चरण पादुकाएं सौंपीं तो भ्रातृप्रेम और त्याग का प्रसंग सजीव हो उठा। इसके बाद राज सिंहासन पर श्रीराम-जानकी विराजे। वेदांत आश्रम के महंत हरिहर दास जी महाराज ने गुरु वशिष्ठ की भूमिका निभाते हुए भगवान श्रीराम को राजमुकुट धारण कराया, वहीं नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती शशि यादव ने माता सीता को मुकुट पहनाया। चारों ओर दीपों की जगमगाहट और जय श्रीराम के उद्घोष के बीच ऐसा प्रतीत हुआ मानो अयोध्या में एक बार फिर रामराज्य का सूर्योदय हो रहा हो।