कृषि भूमि पर अवैध कॉलोनियों की बाढ़, सरकार को लग रही करोड़ों की चपत

गौरझामर में करीब 13 एकड़ कृषि भूमि पर विकसित की जा रही कॉलोनी, हरे-भरे पेड़ों की कटाई से पर्यावरण को भी नुकसान

 

देवरी कला। देवरी क्षेत्र में कृषि भूमि पर अवैध कॉलोनियों के विकास का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। नियमों को दरकिनार कर कृषि भूमि पर धड़ल्ले से प्लॉटिंग की जा रही है। कहीं सड़कें बनाई जा रही हैं तो कहीं नालियों का निर्माण कर कॉलोनी का स्वरूप तैयार किया जा रहा है। इस पूरे खेल में शासन के नियमों की अनदेखी के साथ-साथ सरकारी राजस्व को भी लाखों-करोड़ों रुपये की चपत लगने की आशंका जताई जा रही है। वहीं कॉलोनियों के विकास के नाम पर हरे-भरे वृक्षों की कटाई से पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच रहा है।

जानकारी के अनुसार, देवरी तहसील से लेकर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों तक कृषि भूमि पर बिना वैधानिक अनुमति के आवासीय कॉलोनियां विकसित किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। नियमानुसार आवश्यक भूमि उपयोग परिवर्तन, कॉलोनाइजर संबंधी अनुमति, स्वीकृत अभिन्यास और अन्य वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी किए बिना ही प्लॉटिंग और विकास कार्य किए जाने के आरोप हैं। इसके बावजूद संबंधित क्षेत्रों में निर्माण कार्य जारी होना प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े कर रहा है।

गौरझामर में 13 एकड़ जमीन पर कॉलोनी विकसित करने की तैयारी

ताजा मामला गौरझामर थाना क्षेत्र का है। सागर रोड पर कृषि मंडी से आगे हनुमान मंदिर के समीप लगभग 13 एकड़ कृषि भूमि पर कॉलोनी विकसित किए जाने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि यहां कॉलोनी के लिए सड़कें और नालियां तैयार की जा रही हैं तथा प्लॉटिंग के लिए पूरा लेआउट भी बनाया जा चुका है। मौके पर विकास कार्य जारी होने की बात सामने आई है।

हैरानी की बात यह है कि कॉलोनी विकसित करने वाले व्यक्ति ने स्वयं बताया कि अभी तक उसकी जमीन की रजिस्ट्री भी नहीं हुई है। इसके अलावा रेरा से कोई अनुमति प्राप्त नहीं हुई है और न ही ग्राम पंचायत अथवा कलेक्टर कार्यालय से कॉलोनी विकसित करने की अनुमति ली गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब जमीन का स्वामित्व और आवश्यक अनुमतियां ही स्पष्ट नहीं हैं तो लगभग 13 एकड़ भूमि पर सड़क, नाली और प्लॉटिंग का कार्य किस आधार पर किया जा रहा है?

न अनुमति, न स्वीकृत नक्शा, फिर कैसे हो रही प्लॉटिंग?

नियमानुसार कृषि भूमि पर आवासीय उपयोग के लिए संबंधित वैधानिक अनुमतियां और भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी करना आवश्यक है। मध्यप्रदेश में लागू कॉलोनी विकास संबंधी प्रावधानों के तहत भी निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन जरूरी है। इसके बावजूद यदि बिना अनुमति कॉलोनी विकसित की जा रही है तो यह जांच का विषय है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि संबंधित विभागों के अधिकारियों को इतने बड़े क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों की जानकारी क्यों नहीं है? क्या राजस्व विभाग, नगर एवं ग्राम निवेश विभाग, ग्राम पंचायत और जिला प्रशासन द्वारा मौके का निरीक्षण किया गया है?

हरे-भरे वृक्षों की कटाई से पर्यावरण पर संकट
कॉलोनी विकसित करने के लिए जमीन को समतल करने और सड़कें बनाने के दौरान हरे-भरे पेड़ों की कटाई किए जाने की बात भी सामने आ रही है। यदि बिना आवश्यक अनुमति के वृक्षों को काटा जा रहा है तो यह पर्यावरण संरक्षण के नियमों के उल्लंघन का मामला भी बन सकता है। विकास के नाम पर हरियाली समाप्त होना आने वाले समय में पर्यावरण और स्थानीय आबादी दोनों के लिए चिंता का विषय है।

प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार
अब सवाल जिला प्रशासन से है कि गौरझामर में लगभग 13 एकड़ कृषि भूमि पर विकसित की जा रही इस कॉलोनी की निष्पक्ष जांच कब होगी? क्या संबंधित भूमि के दस्तावेजों, रजिस्ट्री, डायवर्जन, रेरा पंजीयन, कॉलोनाइजर लाइसेंस और स्वीकृत लेआउट की जांच की जाएगी? क्या बिना अनुमति किए गए निर्माण कार्यों पर रोक लगाई जाएगी?

क्षेत्रवासियों की मांग है कि जिला प्रशासन पूरे मामले की जांच कराए और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाए, ताकि कृषि भूमि पर अवैध कॉलोनियों के बढ़ते कारोबार पर अंकुश लगाया जा सके और आम लोगों की मेहनत की कमाई भी सुरक्षित रह सके।