आलोट। अपराध करने के बाद समय बीत जाने से कानून की पकड़ कमजोर नहीं पड़ती। इसका उदाहरण आलोट पुलिस की हालिया कार्रवाई में देखने को मिला है। विक्रमगढ़ में करीब छह माह पूर्व हुई आगजनी और तोड़फोड़ की घटना में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर एक क्लीनिक और मकान में तोड़फोड़ कर आग लगाने का आरोप है। पुलिस ने घटना से जुड़े वीडियो फुटेज एवं अन्य माध्यमों से प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया।

पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 2 मई 2026 को विक्रमगढ़ के माली मोहल्ले में मनीष माली की हत्या की घटना के बाद आक्रोशित लोगों द्वारा फरियादी के लड़के प्रकाश माली के पठान मोहल्ला स्थित क्लीनिक एवं मकान में तोड़फोड़ कर आगजनी की गई थी। मामले में फरियादी की रिपोर्ट पर 3 मई 2026 को थाना आलोट में अपराध क्रमांक 202/2026, धारा 324(5), 326(जी) बीएनएस के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया था।

घटना के बाद पुलिस ने वीडियो फुटेज और अन्य माध्यमों से प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की। विवेचना के दौरान पुलिस ने कार्रवाई करते हुए हरीश उर्फ हरिशंकर माली (36), सुरेश माली (51), मोनू माली (21), घनश्याम उर्फ गणेश माली (50), जगदीश माली (39), मुकेश माली (40), रवि उर्फ नानटा (33) तथा एक अन्य मुकेश माली (40), सभी निवासी मालीपुरा विक्रमगढ़, को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश किया जा रहा है।

वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में हुई कार्रवाई

पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण विवेक कुमार लाल के मार्गदर्शन तथा अनुविभागीय अधिकारी पुलिस पल्लवी गौर के मार्गदर्शन में थाना आलोट पुलिस ने यह कार्रवाई की। थाना प्रभारी निरीक्षक योगेश पाटीदार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने प्रकरण की विवेचना और आरोपियों की गिरफ्तारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इनकी रही सराहनीय भूमिका

कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक योगेश पाटीदार, उपनिरीक्षक मनोज पाटीदार, उपनिरीक्षक प्रमोद राठौर, सहायक उपनिरीक्षक दशरथ पाटीदार सहित प्रधान आरक्षक राहुल राठौर, प्रधान आरक्षक कृष्णपाल सिंह, आरक्षक लोकेन्द्र, ईश्वर सिंह, विनोद, सुनील, चालक आरक्षक अनिल कुमार, अजीत जाट, अभिमनंदन, सोनक पोरवाल, शुभम भाटी एवं लोकेश पाटीदार का सराहनीय योगदान रहा।

आलोट पुलिस की इस कार्रवाई से स्पष्ट संदेश है कि गंभीर घटनाओं में शामिल आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए पुलिस साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई जारी रखती है। घटना के महीनों बाद भी आरोपियों तक पहुंचकर गिरफ्तारी करना विवेचना की दिशा में महत्वपूर्ण कार्रवाई है।