कागज़ों पर नंबर वन धरातल पर शून्य: बम्होरी कला में खाकी तार-तार, एक ही रात में 4 घरों के चटके ताले, 30 लाख पार!

दित्यपाल राजपूत 

टीकमगढ़ पलेरा।।साहब जब पुलिस थानों को नंबर वन का तमगा बांट रही थी तब शायद वह यह भूल गई कि कागज़ी शेर कभी ज़मीन पर शिकार नहीं रोक सकते। जिस थाने की पीठ थपथपाई जा रही थी, उसी के सीने पर पैर रखकर चोरों ने पुलिसिया गश्त और सुरक्षा के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। मामला बम्होरी कला गांव का है जहां बीती रात बेखौफ चोरों ने तांडव मचाते हुए एक नहीं, दो नहीं, बल्कि एक साथ चार घरों को निशाना बनाया और ₹30 लाख से अधिक के जेवरात व नकदी समेटकर नौ दो ग्यारह हो गए।इस दुस्साहसिक वारदात ने साबित कर दिया है कि जिले में अपराधी सीना तानकर घूम रहे हैं और पुलिस सिर्फ जागरूकता अभियानों की तस्वीरें खिंचवाने में मसरूफ है।
*चोरों का खुला चैलेंज: एक रात, चार शिकार*
बमोरी कला गांव में बीती रात जो हुआ, उसने पुलिस के खूफिया तंत्र और रात्रि गश्त की पोल खोलकर रख दी है। चोरों ने पूरी तसल्ली से गांव के चार घरों को निशाना बनाया: जिसमें गणपत कुशवाहा बिंदी अहिरवार संतोष अहिरवार रईस पठान
सुबह जब इन परिवारों की आंख खुली, तो घर का मंजर देखकर पैरों तले जमीन खिसक गई। ताले टूटे थे, अलमारियां खुली थीं और जिंदगी भर की कमाई गायब थी। एक ही रात में चार घरों में डाका पड़ने की खबर से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा।
*सिर्फ इवेंट मैनेजमेंट तक सीमित रह गई पुलिस!* ग्रामीणों का आरोप है कि बम्होरी कला पुलिस का काम सिर्फ और सिर्फ कागजी खानापूर्ति और सोशल मीडिया पर जागरूकता अभियानों के नाम पर वाहवाही लूटने तक सीमित रह गया है। बड़ा सवाल यह है जब अपराधी बेखौफ होकर एक ही गांव में चार-चार घरों के ताले तोड़ रहे थे, तब नंबर वन थाने की पुलिस कहां खर्राटे ले रही थी? क्या पुलिस की रात्रि गश्त सिर्फ कागजी रजिस्टरों में दर्ज हो रही है?
अपुष्ट आंकड़ों के अनुसार, चोरी गई संपत्ति की कीमत 30 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है। हालांकि, पुलिस अब हमेशा की तरह जांच जारी है और जल्द खुलासा होगा का रटा-रटाया राग अलाप रही है। डैमेज कंट्रोल के लिए मौके पर पहुंची बम्होरी कला पुलिस साक्ष्य जुटाने का नाटक तो कर रही है लेकिन जनता का भरोसा खाकी से पूरी तरह उठ चुका है।
*धरातल पर व्यवस्था शून्य*
यह घटना पुलिस की कार्यशैली पर एक बहुत बड़ा तमाचा है। जब तक पुलिस थानों की रैंकिंग सुधारने और आंकड़ों की बाजीगरी में व्यस्त रहेगी तब तक जनता ऐसे ही लुटती रहेगी। अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें कानून का रत्ती भर भी खौफ नहीं है।अब देखना यह है कि कागज़ों पर नंबर वन का तमगा टांगने वाली बम्होरी कला पुलिस इस खुली चुनौती का जवाब दे पाती है या फिर हमेशा की तरह यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाता है।