सिवनी -:

ग्राम भेड़ा की चरनोई भूमि पर कथित अतिक्रमण हटाने को लेकर प्रशासनिक स्तर पर चल रही खींचतान ने एक बार फिर नया मोड़ ले लिया है। सोमवार को जहां तहसील न्यायालय के आदेश के पालन में बेदखली की कार्रवाई प्रस्तावित थी, वहीं कार्रवाई से ठीक पहले अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) घंसौर द्वारा नया स्थगन आदेश जारी कर दिया गया। इसके बाद पूरे दिन कार्रवाई की तैयारी करने के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाया जा सका।

 

मामला ग्राम भेड़ा स्थित खसरा नंबर 167 रकबा 0.47 हेक्टेयर चरनोई भूमि से जुड़ा है। तहसील न्यायालय द्वारा अतिक्रमण हटाने का आदेश जारी किया गया था, जिसके पालन के लिए ग्राम पंचायत गोलहिया ने 22 जून को कार्रवाई की तिथि निर्धारित की थी। पंचायत द्वारा लगभग 50 मजदूर, आधा दर्जन कोटवार, कई पटवारी तथा पंचायत अमले को मौके पर बुलाया गया था। सरपंच, सचिव और कर्मचारी भी पूरे दिन कार्रवाई के लिए मौजूद रहे, लेकिन न तो बेदखली हुई और न ही प्रशासनिक कार्रवाई आगे बढ़ सकी।

 

*एक साल पहले भी लगा था स्थगन, अब फिर वही कहानी*

 

दस्तावेजों के अनुसार इस मामले में इससे पहले भी अनुविभागीय अधिकारी न्यायालय द्वारा तहसीलदार के आदेश के क्रियान्वयन पर स्थगन दिया गया था। लगभग एक वर्ष तक मामला लंबित रहने के बाद अब जब पुनः अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई तो फिर नया स्थगन आदेश जारी कर दिया गया।

 

22 जून 2026 को जारी आदेश में एसडीएम न्यायालय ने तहसीलदार घंसौर को निर्देशित किया है कि अपील प्रकरण में विधिवत सुनवाई और आदेश होने तक 12 जून 2026 को जारी बेदखली संबंधी पत्र के आधार पर कोई कार्रवाई न की जाए।

 

*गांव में चर्चा, आखिर किसे बचा रहा है प्रशासन?*

 

लगातार स्थगन और बेदखली कार्रवाई टलने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पूरा गांव चरनोई भूमि से अतिक्रमण हटाने के पक्ष में है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर मामले को लगातार उलझाया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र में यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि प्रभावशाली लोगों के दबाव या अन्य कारणों से कार्रवाई को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है। हालांकि इन चर्चाओं की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

 

*उठ रहे हैं कई बड़े सवाल*

 

यदि भूमि वास्तव में चरनोई की है तो एक वर्ष से अधिक समय से अतिक्रमण क्यों नहीं हटाया गया?

 

पहले स्थगन और अब दोबारा स्थगन की आवश्यकता क्यों पड़ी?

 

जब पंचायत और राजस्व अमला कार्रवाई के लिए तैयार था तो अंतिम समय में रोक क्यों लगाई गई?

 

क्या प्रशासनिक स्तर पर समन्वय की कमी है या मामला जानबूझकर लंबित रखा जा रहा है?

 

आखिर सरकारी आदेशों का पालन होगा कब?

 

 

*ग्रामीणों में बढ़ रहा असंतोष*

 

भेड़ा और आसपास के ग्रामीणों का कहना है कि चरनोई भूमि गांव की सार्वजनिक संपत्ति है और उस पर कब्जे का मामला लंबे समय से विवाद का विषय बना हुआ है। लोगों का आरोप है कि लगातार तारीखें देने और फिर कार्रवाई टालने से प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस बहुचर्चित मामले में स्पष्ट स्थिति सामने लाकर चरनोई भूमि के संबंध में अंतिम निर्णय कब तक सुनिश्चित करता है।