सिंगरौली
जिले की सड़कों पर 'अडानी के काल' का नंगा नाच: विकास के नाम पर बिछ रही लाशें
ऊर्जा धानी कहे जाने वाले सिंगरौली की सड़कें अब कोल-परिवहन और औद्योगिक वाहनों के टायर तले 'लाल' हो चुकी हैं। जिसे हुक्मरान 'देश का विकास' कह रहे हैं, हकीकत में वह एक आम आदमी के घर के आंगन का अंधेरा है। गनियारी निवासी बालक राम सोनी की मौत महज एक 'हादसा' नहीं, बल्कि उस बेलगाम सिस्टम की क्रूरता है जो पूंजीपतियों के मुनाफे के आगे इंसानी जान की कीमत कौड़ी बराबर भी नहीं समझता।
तड़पती रही जिंदगी, सोता रहा प्रशासन
तेलाई क्षेत्र में अडानी की शिफ्ट बस ने बालक राम सोनी को जिस बेरहमी से कुचला, वह रूह कंपा देने वाला है। मिनटों तक वह युवक बस के नीचे दबा रहा, तड़पता रहा, लेकिन तेज रफ्तार के सौदागरों के दिल नहीं पसीजे। स्थानीय लोगों ने जद्दोजहद कर उन्हें बाहर निकाला, पर तब तक मौत अपनी बाजी जीत चुकी थी। एक हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया, एक मां का लाल चला गया और एक घर का आधार स्तंभ ढह गया।
'चार रास्ता' वाली जिम्मेदारी और विकास का ढोंग
विडंबना देखिए, जिन कंधों पर सुरक्षा की जिम्मेदारी है, वे अधिकारी और जिम्मेदार सफेदपोश मौके पर आते हैं, 'चार रास्ता' (रस्म अदायगी) करते हैं और फाइलों में 'विकास' की झूठी इबारत लिखकर वापस लौट जाते हैं। जनता पूछ रही है—क्या इसी लहू-लुहान सड़क को आप विकास कहते हैं? अगर एक परिवार का सहारा छीन लेना ही प्रगति है, तो सिंगरौली को ऐसा खूनी विकास नहीं चाहिए।
गौ-हत्या का पाप और दोमुंही राजनीति
हादसे में सिर्फ इंसान नहीं, बल्कि पूजनीय गौ-वंश के भी लहूलुहान होने की खबर है। खुद को 'गौ-सेवक' बताने वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार और उनका प्रशासन आज मौन है। एक तरफ गौ-पूजन का ढोंग और दूसरी तरफ अडानी के वाहनों से सड़कों पर बहता बेगुनाहों और गौ-वंश का खून! क्या सत्ता की मलाई ने सिस्टम की आंखों पर पट्टी बांध दी है?
अब तक क्यों नहीं हुई FIR?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस नरसंहार के बाद भी अडानी के जिम्मेदार अधिकारियों पर अब तक कोई कठोर कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या कानून सिर्फ गरीबों के लिए है? क्या रसूखदारों को खून करने की खुली छूट दे दी गई है?
> जनता की आवाज: "हमें सड़कों पर उड़ती धूल और बिछती लाशें नहीं चाहिए। हमें वह सुरक्षा चाहिए जो हमारे अपनों को शाम को घर सुरक्षित वापस ला सके।"

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