*मोहगांव नगर में गौ तस्करी का खूनी संग्राम*

मोहगाँव बाजार में मौत का तांडव: 23 लाख 23हजार का ठेका और गोवंश की खुलेआम तस्करी

मोहगांव नगर परिषद और स्थानीय प्रशासन की नाक के नीचे मोहगाँव बाजार में इंसानियत को शर्मसार करने वाला खेल चलाया जा रहा है। कहने को तो यहाँ 23 लाख रुपये का ठेका हुआ है, लेकिन इस ठेके की आड़ में जो काला कारोबार हो रहा है, वह किसी बड़े घोटाले और क्रूरता से कम नहीं है।

 

 पैसा जेब में, गोवंश मौत के हवाले

सूत्रों की मानें तो मोहगाँव से हर रोज अवैध तरीके से गोवंश की तस्करी की जा रही है। हैरत की बात यह है कि यह सारा तस्करी का खेल कई पुराने और नए तस्करो से मिलकर किया जा रहा है जो अपने आप को नगर के किंग मानते है। इस तरीके से तस्करी का माध्यम बना है गोवंश का बैल बाजार इस बाजार में किसानों के 30 परसेंट गोवंश आते है 70% तस्करी वाले गौ वंश इसका ऐसा गणित कुल 500 प्रति मंगलवार बाजार में गौ वंश आते हैं यदि 70% निकाल लिया जाए तो 250 नग सक्रिय तस्करों द्वारा लाया जाता है अब सरकारी चिट्ठी मूल्य 300 रूपये , परंतु उनके द्वारा 2 नग के 1000 लिया जाता है जो कि दो गोवंश पर हजार रुपए सीधा-सीधा मोटा मुनाफा प्रति सप्ताह डेढ़ से ₹2 लाख यह उन तस्करी वाले गोवंश से ही प्रति सप्ताह कमाई कर लेते हैं। इसलिए इस बाजार को सरकारी वैल्यू से भी बढ़ाकर ठेका लिया गया ऐसे में अब सवाल उठा सकते आपकी किस तरीके से इसके द्वारा मोटी कमाई की जाती है 

 

आप समझ सकते हैं कि मोहगांव जो गोवंश बाजार है मुलताई के ठेकेदार द्वारा लिया गया परंतु क्षेत्र के बाहर का होने के कारण बाजार नहीं चला पाने के कारण उन्होंने स्थानीय लोगों को सम्मिलित किया और बाजार कोई एक मजबूती देना चाह रहे है अब सवाल यह उठता है कि उनके पैदल ले जाने वाले गुर्गे भी कोई कम नहीं है प्रति सप्ताह 30 से 35 लोग ऐसे रखे जाते हैं जिनके नाम पर यह चिट्ठी सौदा का सीधा-सीधा ढोंग करते हैं

 ओर पैदल खुफिया रास्तों से ले जाया जाता है। ये तस्कर बड़े आराम से मोहगांव से होते हुए पंढरी गांव इनका मुख्य सरगना माना जाता है जहां से पास करते हुए शिवनी ,नरखेड के रास्ते महाराष्ट्र में कदम रख देतेहैं के जहाँ इन बेजुबान जानवरों को निर्दयता से काट दिया जाता है।

 

 *नरक से बदतर हालात*। हालत यह है कि मोहगांव की सर्प नदी पूरी तरह सूख चुकी है नगर की गंदी नाली का पानी भाखड़ा नदी में जमा हो रहा है और वही इन निहत्ते जानवरों को बाजार के दिन पिलाया जाता है 

 

 

मोहगाँव यह गोवंश बाजार तस्करी का अड्डा बन चुका है यहां जिले भर के कई क्षेत्रों से पिकअप जैसे वाहनों में गोवंश लाया जाता है गौ वंशअधिनियम के तहत किसी भी वाहन में गव वंश लाना ले जाना प्रतिबंधित है जो सरकार के खुली आंख के सामने धड़ल्ले सेहो रहा है 

 

जहर पिला रहा प्रशासन: गोवंश को नदी-नाले का वह गंदा पानी पिलाया जा रहा है जिसमें मल-मूत्र मिला होता है। यह सीधे तौर पर पशु क्रूरता की पराकाष्ठा है और कानूनन अपराध है।

 सिर्फ मोहगाँव ही नहीं, बल्कि सवरनी और रामाकोना भी अब गोवंश तस्करी के सुरक्षित ठिकाने बन चुके हैं। 

 

*प्रशासन आखिर किसके सामने नतमस्तक*। ऐसा नहीं है कि इसको वंश को बाजार को बंद नहीं किया गया था बंद भी हुआ था आखिर इन पर ठोस कार्रवाई से कैसे वंचित रह जाते सूत्र यह भी बताते हैं कि उनके आकर बड़े-बड़े होने के कारण इन्हें खुली छूट देते हैं और कहते नजर या अपने आप को किंग बताते हैं यदि इस बाजार से तस्करी के पुराने राज खोल लिए जाए तो कई नाम आज भी उजागर हो सकते हैं