सिवनी -:

घंसौर थाना क्षेत्र के पनारझिर तिराहे में हुए एक सड़क हादसे के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। परिजनों का आरोप है कि दुर्घटना के लगभग एक माह बाद एफआईआर दर्ज की गई, जबकि घटना के दो माह बीत जाने के बाद भी दुर्घटना में शामिल ट्रैक्टर को पुलिस जब्त नहीं कर सकी है। पीड़ित परिवार का यह भी आरोप है कि उन्होंने पुलिस को जो जानकारी दी थी, रिपोर्ट में उससे अलग तथ्य दर्ज किए गए।

जानकारी के अनुसार 4 अप्रैल 2026 की रात करीब 11:30 बजे तिलगांव निवासी दो युवक मोटरसाइकिल से अपने गांव लौट रहे थे। इसी दौरान पायलीखुर्द की ओर से आ रहे ट्रैक्टर क्रमांक एमपी-22 एए 3285 ने कथित रूप से लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाते हुए मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी। हादसा इतना गंभीर था कि दोनों युवक बुरी तरह घायल हो गए।

परिजनों के मुताबिक दुर्घटना के बाद घायलों को सीधे जबलपुर के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका उपचार कराया गया। जांच में दोनों युवकों के एक-एक पैर में गंभीर फ्रैक्चर पाया गया। परिजनों का कहना है कि दोनों युवक अपने-अपने परिवार के प्रमुख कमाने वाले सदस्य हैं। दुर्घटना के बाद लंबे समय तक बिस्तर पर रहने के कारण उनकी आय पूरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे परिवार आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

*इलाज का भरोसा, फिर मुकरने का आरोप*

परिजनों का आरोप है कि दुर्घटना के बाद ट्रैक्टर चालक ने इलाज का पूरा खर्च उठाने का आश्वासन दिया था। इसी भरोसे में परिवार कुछ समय तक कानूनी कार्रवाई से दूर रहा, लेकिन बाद में आरोपी पक्ष द्वारा सहयोग नहीं किए जाने पर उन्हें पुलिस की शरण लेनी पड़ी।

*एफआईआर दर्ज करने में देरी पर सवाल*

पीड़ित परिवार का आरोप है कि दुर्घटना 4 अप्रैल को हुई, लेकिन एफआईआर 1 मई को दर्ज की गई। उनका कहना है कि घटना की जानकारी पुलिस को पहले ही दे दी गई थी, इसके बावजूद समय पर अपराध दर्ज नहीं किया गया। इससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

*"कुछ बताया, कुछ और लिखा"*

परिजनों का आरोप है कि उन्होंने जो तथ्य पुलिस को बताए, उन्हें रिपोर्ट में पूरी तरह शामिल नहीं किया गया। उनका कहना है कि शिकायत के महत्वपूर्ण बिंदुओं को नजरअंदाज किया गया, जिससे मामले की निष्पक्ष जांच को लेकर संदेह पैदा हो रहा है।

*दो माह बाद भी नहीं जब्त हुआ ट्रैक्टर*

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस ट्रैक्टर से हादसा हुआ, उसे अब तक जब्त क्यों नहीं किया गया। परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते वाहन को जब्त कर जांच की जाती तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते थे। घटना के दो माह बाद भी ट्रैक्टर के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में भी नाराजगी है।

*निष्पक्ष जांच की मांग*

पीड़ित परिवार ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दुर्घटना में शामिल ट्रैक्टर को तत्काल जब्त करने तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

*सवाल जो जवाब मांग रहे हैं...*

जब हादसे में दोनों युवकों के पैर टूट गए और वे महीनों तक इलाज कराते रहे, तो एफआईआर दर्ज करने में एक माह की देरी क्यों हुई?

दुर्घटना में शामिल ट्रैक्टर दो माह बाद भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर क्यों है?

क्या पीड़ित परिवार की शिकायत को पूरी तरह दर्ज किया गया?

परिवार के कमाने वाले सदस्यों के घायल होने के बावजूद कार्रवाई इतनी धीमी क्यों रही?

इन सवालों के जवाब अब सिर्फ पीड़ित परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लोग जानना चाहते हैं।