विदिशा जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ जिला प्रशासन ने एक बड़ी और सख्त कार्रवाई का संकेत दिया है। जिले के गुरारिया लश्करपुर स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकान (कोड 2701113) के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों के आधार पर की गई जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता को जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों द्वारा दी गई शिकायत को गंभीरता से लेते हुए, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की टीम ने तत्काल प्रभाव से जांच के निर्देश दिए थे।
जनसुनवाई में खुली अनियमितताओं की पोल
विदिशा जिला प्रशासन की प्राथमिकता सदैव से आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान रही है। इसी क्रम में 'जनसुनवाई' कार्यक्रम के दौरान जब गुरारिया लश्करपुर के ग्रामीणों ने उचित मूल्य दुकान के संचालन में हो रही धांधली के संबंध में शिकायत की, तो कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल जांच दल का गठन किया। जिला आपूर्ति अधिकारी श्री अनिल तंतुवाय ने बताया कि जनसुनवाई में मिली शिकायतों के आधार पर विभागीय अधिकारियों की एक टीम मौके पर भेजी गई। यह जांच यह सुनिश्चित करने के लिए की गई थी कि क्या वाकई पात्र हितग्राहियों को सरकार द्वारा मिलने वाला राशन समय पर और पूर्ण मात्रा में प्राप्त हो रहा है।
जांच में मिली चौंकाने वाली खामियां
जांच दल जब गुरारिया लश्करपुर पहुँचा, तो वहाँ स्थिति शिकायत के अनुरूप ही अत्यंत दयनीय पाई गई। जांच के दौरान कई ऐसी खामियाँ सामने आई हैं, जिन्होंने PDS प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं:
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दुकान का संचालन: सबसे प्रमुख बात यह सामने आई कि उचित मूल्य दुकान अपने निर्धारित स्थान पर संचालित ही नहीं की जा रही थी। यह सरकारी नियमों का सीधा उल्लंघन है, क्योंकि उचित मूल्य दुकानों का संचालन उन्हीं स्थानों पर होना अनिवार्य है, जहाँ उनका आवंटन किया गया है ताकि उपभोक्ताओं को भटकना न पड़े।
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दुकान खुलने का समय: ग्रामीणों और स्थानीय निवासियों ने अपने बयानों में स्पष्ट रूप से बताया कि दुकान अत्यंत अनियमित तरीके से खोली जाती है। उपभोक्ताओं को राशन लेने के लिए दुकान पर अक्सर ताला लटका मिलता है, जिससे उन्हें बार-बार चक्कर काटने पड़ते हैं।
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वितरण में देरी: राशन के वितरण को लेकर भी भारी असंतोष व्याप्त था। हितग्राहियों का कहना है कि उन्हें समय पर राशन नहीं मिल रहा है, जिससे उन्हें खाद्य सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधा के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। कई बार लोगों को अपनी दिहाड़ी छोड़कर घंटों दुकान के बाहर इंतजार करना पड़ता है।
बायोमेट्रिक और ओटीपी के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा
जांच में सबसे गंभीर और चिंताजनक पहलू बायोमेट्रिक सत्यापन का निकला। उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया है कि राशन विक्रेता और सहायक विक्रेता द्वारा धांधली का एक नया तरीका अपनाया जा रहा है। ग्रामीणों के कथनों के अनुसार, उनसे बायोमेट्रिक मशीन पर अंगूठा लगवा लिया जाता है या फिर उनका ओटीपी (OTP) दर्ज कर लिया जाता है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें राशन की मात्रा नहीं दी जाती।
कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की कि रिकॉर्ड में वितरण की प्रक्रिया पूर्ण दिखा दी जाती है, जबकि वास्तविकता में उन्हें महीनों से अनाज प्राप्त नहीं हुआ है। यह साफ़ तौर पर एक बड़ा आर्थिक अपराध है, जिसमें डिजिटल सिस्टम का दुरुपयोग कर हितग्राहियों के हिस्से का राशन कालाबाजारी के लिए बचाया जा रहा है। जांच टीम ने इन बयानों को रिकॉर्ड किया है और साक्ष्यों का संकलन किया है, जो आने वाली कानूनी कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
जिम्मेदार विक्रेताओं पर दर्ज होगा केस
प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दुकान के विक्रेता और सहायक विक्रेता की भूमिका संदेहास्पद है। जिला आपूर्ति विभाग के अनुसार, दुकान का संचालन अधिकांशतः सहायक विक्रेता द्वारा किया जाता है, लेकिन जिम्मेदारी पूरी तरह से विक्रेता की भी है। इन गंभीर अनियमितताओं के आधार पर अब प्रशासन ने उन दोनों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज करने की तैयारी शुरू कर दी है।
संबंधित फाइलों को तैयार कर आगे की वैधानिक कार्रवाई हेतु विदिशा के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि दोषी पाए जाने पर विक्रेता और सहायक विक्रेता को कतई नहीं बख्शा जाएगा और उन्हें नियमानुसार दंडित किया जाएगा।
प्रशासन का सख्त संदेश
विदिशा प्रशासन ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका लक्ष्य समाज के अंतिम छोर तक खड़े व्यक्ति को खाद्य सुरक्षा प्रदान करना है। इसमें किसी भी स्तर पर होने वाली लापरवाही, भ्रष्टाचार या हितग्राहियों के अधिकारों का हनन करना एक अक्षम्य अपराध है।
प्रशासन की ओर से कहा गया है कि भविष्य में भी यदि किसी अन्य दुकान के विरुद्ध ऐसी शिकायत प्राप्त होती है, तो उसे गंभीरता से लिया जाएगा और बिना किसी ढिलाई के जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। यह कार्रवाई अन्य राशन दुकान संचालकों के लिए भी एक चेतावनी है कि वे अपने कार्य के प्रति पूरी ईमानदारी बरतें और सरकार द्वारा निर्धारित मानकों का पालन करें।
नागरिकों से अपील
विदिशा जिला प्रशासन ने आम नागरिकों और विशेषकर राशन कार्ड धारकों से भी अपील की है कि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें। यदि राशन लेने के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता, कम राशन मिलने, समय पर दुकान न खुलने या बायोमेट्रिक के बाद भी राशन न देने जैसी कोई शिकायत हो, तो उसे तुरंत जनसुनवाई या संबंधित विभाग के पोर्टल पर दर्ज कराएं। प्रशासन का लक्ष्य एक पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त वितरण प्रणाली सुनिश्चित करना है, जिसमें जनता का सहयोग अत्यंत आवश्यक है।
Image Source: https://vidisha.mpinfo.org
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