आलोट। नगर के शासकीय सांदीपनि विद्यालय में गुरु पूर्णिमा पखवाड़े के चतुर्थ दिवस शनिवार को "गुरु का जीवन में महत्व" विषय पर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा, गुरु के आदर्श स्वरूप तथा उनके प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता के भाव से जोड़ना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्राचार्य फिरोज खान ने माँ सरस्वती के पूजन एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि गुरु केवल पाठ्य ज्ञान देने वाले शिक्षक नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण के सच्चे शिल्पकार होते हैं। गुरु ही अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं और जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं। भारतीय संस्कृति में गुरु को ईश्वर के समान सम्मान इसलिए दिया गया है क्योंकि वे संस्कार, चरित्र और जीवन मूल्यों की नींव रखते हैं।
प्रतियोगिता में कक्षा 6 से 12वीं तक के विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह, अनुशासन और रचनात्मकता के साथ भाग लिया। विद्यार्थियों ने अपने निबंधों में गुरु-शिष्य परंपरा, शिक्षा का महत्व, नैतिक मूल्यों, संस्कारों तथा राष्ट्र निर्माण में गुरु की भूमिका पर प्रभावशाली विचार प्रस्तुत किए। प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों की लेखन क्षमता, अभिव्यक्ति कौशल और भारतीय संस्कृति के प्रति उनकी गहरी समझ देखने को मिली।
उप प्राचार्य पीयूष शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में सफलता प्राप्त करना नहीं, बल्कि श्रेष्ठ चरित्र, अनुशासन, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास करना है। गुरु के मार्गदर्शन में अर्जित ज्ञान ही जीवन को सफल, सार्थक और उद्देश्यपूर्ण बनाता है।
कार्यक्रम में शिक्षिका शिवांगी मिठ्ठोलिया, शानू दायमा, तथा शिक्षक उमेश, ब्रजराज सिंह, गोपाल पोरवाल, सतीश मीणा, मडिया परमार एवं कार्यक्रम समन्वयक पूजा अग्रवाल सहित विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे। सभी शिक्षकों ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें गुरुजनों के प्रति सम्मान, अनुशासन और सतत ज्ञानार्जन के लिए प्रेरित किया।
विद्यालय परिवार ने बताया कि गुरु पूर्णिमा पखवाड़े के अंतर्गत आगामी दिनों में भी शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं नैतिक मूल्यों पर आधारित विविध गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा और जीवन मूल्यों के प्रति जागरूकता एवं सकारात्मक दृष्टिकोण और अधिक सुदृढ़ हो सके।
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