भारत के प्रथम गृह मंत्री, आधुनिक अखंड भारत के मुख्य शिल्पी और देश के महान 'लौह पुरुष' सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर देश भर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसी कड़ी में, मध्य प्रदेश के कटनी जिले स्थित शासकीय तिलक स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कटनी में एक भव्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. सुनील कुमार वाजपेई की अनुशंसा पर आयोजित इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में वक्ताओं ने सरदार पटेल के ओजस्वी व्यक्तित्व, उनके कृतित्व, राष्ट्रीय एकता और देश के राष्ट्र निर्माण में दिए गए उनके अतुलनीय योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।
इस गरिमामयी संगोष्ठी में महाविद्यालय के प्राध्यापकों, विद्वान वक्ताओं के साथ-साथ राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS), राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) और खेल गतिविधियों से जुड़े बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को देश के महान नायकों के आदर्शों से अवगत कराना और उनमें राष्ट्र सेवा की भावना को जागृत करना था।
वक्ताओं के विचार: सरदार पटेल के जीवन संघर्ष और दूरदर्शिता पर प्रकाश
संगोष्ठी के दौरान महाविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षकों और विद्वान वक्ताओं ने सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन के विभिन्न पहलुओं को रेखांकित किया:
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डॉ. माधुरी गर्ग के विचार: डॉ. माधुरी गर्ग ने अपने संबोधन में सरदार पटेल के संघर्षपूर्ण जीवन, उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और अद्भुत नेतृत्व क्षमता को अत्यंत प्रेरणादायी बताया। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल के उच्च आदर्श और मूल्य आज के युवाओं के लिए भी पूरी तरह प्रासंगिक हैं, जिनका अनुसरण कर युवा देश के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
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डॉ. सरदार दिवाकर का संबोधन: डॉ. सरदार दिवाकर ने देश की आजादी के बाद बिखरी हुई देशी रियाسतों के एकीकरण में सरदार पटेल की भूमिका को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि रियासतों के विलय के दौरान सरदार पटेल की दूरदर्शिता और असाधारण राजनीतिक कौशल का ही परिणाम था कि आज हमें एक अखंड और मजबूत भारत देखने को मिलता है।
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प्रो. जी.एम. मुस्तफा के विचार: प्रो. जी.एम. मुस्तफा ने राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे एवं सद्भाव को किसी भी सशक्त राष्ट्र की मुख्य आधारशिला बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की विविधता में एकता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।
कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन
संगोष्ठी का बेहद कुशल और प्रभावी संचालन डॉ. रुक्मणी प्रताप सिंह द्वारा किया गया। अपने संचालन के दौरान उन्होंने सरदार पटेल को 'आधुनिक अखंड भारत का शिल्पी' की संज्ञा दी और उनके राजनीतिक जीवन के विभिन्न मील के पत्थरों को साझा किया। कार्यक्रम के अंत में प्रो. प्रतिमा त्रिपाठी ने संगोष्ठी में उपस्थित सभी अतिथियों, प्राध्यापकों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर महाविद्यालय के कई प्रतिष्ठित शिक्षक एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से डॉ. सूचि सिंह, डॉ. जयप्रकाश अवस्थी, सुश्री अंकिता गोस्वामी, डॉ. विजय कुमार, डॉ. सुशील मिश्रा, डॉ. लक्ष्मी द्विवेदी और श्री अमित चौधरी शामिल रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी विद्यार्थियों से आह्वान किया गया कि वे सरदार पटेल के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं तथा देश की राष्ट्रीय एकता और राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।
image source: https://katni.mpinfo.org
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