बच्चों के सुरक्षित भविष्य, उनके मौलिक अधिकारों के संरक्षण और उनके समग्र विकास को सुनिश्चित करने की दिशा में मध्य प्रदेश शासन और न्यायपालिका द्वारा निरंतर महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में, बच्चों के सुरक्षित भविष्य और उनके अधिकारों के संरक्षण के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पहल के रूप में "सुरक्षित बचपन अभियान" का राज्य स्तरीय शुभारंभ किया गया। इस अभियान का शुभारंभ आज दिनांक 01 नवंबर को प्रशासनिक न्यायाधिपति, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय एवं कार्यपालक अध्यक्ष, मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा ऑनलाइन माध्यम से गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ।
राज्य स्तर पर इस वृहद अभियान के शुभारंभ के ठीक पश्चात, विदिशा जिले में भी इसके सकारात्मक प्रभावों को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से एक विशेष कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई। प्रधान जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री शेख सलीम के कुशल, प्रेरणादायी और दूरदर्शी मार्गदर्शन में विदिशा के एडीआर सेंटर भवन के सभागार में सुरक्षित बचपन अभियान के अंतर्गत "उड़ान" विषयक एक दिवसीय कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण और ज्ञानवर्धक कार्यक्रम में शासकीय सांदीपनी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बरईपुरा (विदिशा) के छात्र-छात्राओं ने अत्यंत उत्साहपूर्वक, सक्रियता और व्यापक सहभागिता दर्ज कराई।
अभियान के उद्देश्य और विधिक योजनाओं की विस्तृत जानकारी
कार्यशाला के मुख्य सत्र के दौरान जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री अनीस उद्दीन अब्बासी ने "सुरक्षित बचपन अभियान" के मूल उद्देश्यों और इसके दूरगामी परिणामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों और उपस्थित गणमान्य नागरिकों को संबोधित करते हुए बताया कि इस अखिल भारतीय अभियान का प्रथम चरण 1 से 6 नवंबर तक संपूर्ण जिले में पूरी सक्रियता के साथ संचालित किया जाएगा।
श्री अब्बासी ने अपने संबोधन में बच्चों के मूलभूत अधिकारों, शासन एवं न्यायपालिका द्वारा चलाई जा रही निःशुल्क विधिक सहायता योजना तथा 'नालसा बाल हितैषी विधिक सेवाएं योजना 2024' के विभिन्न प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि समाज के प्रत्येक बच्चे को उसकी उम्र के अनुरूप शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार प्राप्त होना चाहिए। विधिक सेवा प्राधिकरण का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े बच्चे तक भी न्याय और सुरक्षा की पहुंच सुलभ हो सके।
कानूनी सुरक्षा और बाल अधिकारों से जुड़े आयाम
कार्यशाला को अधिक प्रभावी और व्यावहारिक बनाने के लिए विभिन्न वक्ताओं ने बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कानूनी पहलुओं को बेहद सरल और बोधगम्य भाषा में विद्यार्थियों के साथ साझा किया:
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पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) और किशोर न्याय अधिनियम (JJ Act): श्री सुरजीत सिंह सिकरवार (चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल) एवं श्री अनिमेष तिवारी (असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस काउंसिल) ने विद्यार्थियों को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO Act) और किशोर न्याय अधिनियम, 2015 (JJ Act) की सूक्ष्म बारीकियों से अवगत कराया। उन्होंने बच्चों को उनके अधिकारों, अच्छे और बुरे स्पर्श (Good Touch & Bad Touch) की पहचान, तथा किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता प्राप्त करने के कानूनी उपायों के बारे में जागरूक किया।
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साइबर सुरक्षा, सेक्सटॉर्जन और ऑनलाइन खतरे: आज के डिजिटल युग में इंटरनेट और सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग के साथ बाल सुरक्षा के समक्ष उत्पन्न नई चुनौतियों पर चर्चा करते हुए श्री राजीव चतुर्वेदी (सिस्टम ऑफिसर) एवं श्री विनोद कुशवाह (असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस काउंसिल) ने महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। उन्होंने वर्तमान समय की अत्यंत गंभीर समस्या जैसे व्यक्तिगत व ऑनलाइन सुरक्षा, सेक्सटॉर्जन, साइबर उत्पीड़न के खतरों और उनसे बचाव के पुख्ता उपायों के बारे में उपस्थित विद्यार्थियों को पूरी गहराई से जागरूक किया। वक्ताओं ने बच्चों को इंटरनेट का सुरक्षित उपयोग करने और किसी भी प्रकार के ऑनलाइन फ्रॉड या धमकी की स्थिति में तुरंत अपने अभिभावकों एवं शिक्षकों को सूचित करने की सलाह दी।
नुक्कड़ नाटक के माध्यम से दिया गया सशक्त संदेश
इस एक दिवसीय कार्यशाला का सबसे मुख्य और आकर्षक केंद्र शासकीय सांदीपनी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बरईपुरा के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत किया गया प्रेरणादायक नुक्कड़ नाटक रहा। विद्यार्थियों ने अपनी उत्कृष्ट कला और अभिनय के माध्यम से समाज की कुप्रथाओं और बच्चों से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को मंच पर जीवंत कर दिया।
इस नुक्कड़ नाटक का मुख्य उद्देश्य समाज में बाल अधिकारों के प्रति व्यापक जागरूकता फैलाना, बाल विवाह जैसी गंभीर सामाजिक कुप्रथा की कड़ाई से रोकथाम करना, बाल श्रम का पूर्ण उन्मूलन करना और शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम का व्यापक प्रचार-प्रसार करना था। विद्यार्थियों द्वारा दी गई इस प्रभावशाली प्रस्तुति को वहां मौजूद सभी दर्शकों, न्यायविदों, शिक्षकों और अधिकारियों द्वारा काफी सराहा गया। नाटक के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि एक स्वस्थ और शिक्षित समाज का निर्माण तभी संभव है जब हर बच्चा सुरक्षित हो और उसे शिक्षा के समान अवसर मिल सकें।
निष्कर्ष एवं भविष्य की रूपरेखा
विदिशा में आयोजित यह "उड़ान" कार्यशाला मात्र एक दिवसीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि बाल अधिकारों के संरक्षण और उनकी सुरक्षा की दिशा में एक सशक्त कदम है। इस प्रकार के आयोजनों से न केवल बच्चों में अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ती है, बल्कि वे समाज में एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में उभरते हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, विदिशा के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यशाला ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बाल संरक्षण के लिए प्रशासनिक तत्परता और सामाजिक सहभागिता दोनों का समन्वय कितना आवश्यक है। 1 से 6 नवंबर तक चलने वाले इस प्रथम चरण के अभियानों के माध्यम से विदिशा जिले के दूर-दराज के क्षेत्रों तक भी सुरक्षा और जागरूकता का यह संदेश प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा रहा है।
image source: https://vidisha.mpinfo.org
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