आमला । प्रदेश सरकार सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन आमला नगर के शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। विद्यालय में पिछले कई महीनों से पेयजल का गंभीर संकट बना हुआ है। हालात ऐसे हैं कि सैकड़ों छात्राओं को अपनी प्यास बुझाने के लिए स्कूल परिसर से बाहर जाकर सार्वजनिक नल और हैंडपंप से पानी भरना पड़ रहा है।
विद्यालय में पहले नगर पालिका द्वारा 24 घंटे जलापूर्ति वाले नल का कनेक्शन उपलब्ध कराया गया था, लेकिन नगर पालिका ने वह कनेक्शन काट दिया। इसके बाद विद्यालय प्रबंधन ने 28 जनवरी 2026 को नगर पालिका को लिखित आवेदन देकर कनेक्शन पुनः जोड़ने की मांग की, लेकिन करीब छह माह बीत जाने के बाद भी इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।
विद्यालय में अध्ययनरत छात्राओं की संख्या अधिक होने के कारण प्रतिदिन बड़ी मात्रा में पेयजल की आवश्यकता होती है। वर्तमान में स्कूल परिसर में इतना पानी उपलब्ध नहीं है कि छात्राओं और स्टाफ की जरूरत पूरी हो सके। शुक्रवार को कई छात्राएं विद्यालय के सामने लगे सार्वजनिक नल से बोतल और बाल्टियों में पानी भरकर स्कूल ले जाती हुई दिखाई दीं। यह दृश्य सरकारी स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं की वास्तविक स्थिति को उजागर करता है।
विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि नगर पालिका को कई बार मौखिक एवं लिखित रूप से अवगत कराया गया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। अंततः इस संबंध में जनसुनवाई में भी आवेदन देकर प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की गई।
*नगर पालिका का तर्क*
नगर पालिका के जल प्रभारी अरुण पवार ने बताया कि विद्यालय को जलावर्धन योजना से जल कनेक्शन दिया गया है, जिसमें तीन-चार दिन में एक बार पानी की आपूर्ति होती है। उन्होंने कहा कि विद्यालय उसी से अपनी व्यवस्था करे, अन्यथा स्वयं वैकल्पिक इंतजाम करे।
हालांकि सवाल यह उठ रहा है कि जब नगर पालिका शहर के चौक-चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर 24 घंटे जलापूर्ति वाले नल संचालित कर सकती है, तो सैकड़ों छात्राओं वाले सरकारी विद्यालय को यह सुविधा देने में आखिर बाधा क्या है?
*अब बड़ा सवाल*
सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं को यदि पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधा भी उपलब्ध नहीं हो पा रही है, तो शिक्षा व्यवस्था के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब सभी की निगाहें जाप्रशासन और नगर पालिका पर हैं कि सोमवार तक किया गया आश्वासन धरातल पर उतरता है या छात्राओं को आगे भी पानी के लिए स्कूल से बाहर जाना पड़ेगा।
*"इस संबंध में नगर पालिका परिषद आमला के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) नितिन बिंजवे का पक्ष जानने के लिए उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। इसलिए इस मामले में उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।"*
*इनका कहना है*
"जलावर्धन योजना से स्कूल में कनेक्शन दिया गया है। उसी से पानी की व्यवस्था करें, नहीं तो विद्यालय अपना वैकल्पिक इंतजाम स्वयं करे।"
*अरुण पवार, जल प्रभारी, नगर पालिका आमला*
"जल कनेक्शन बहाल करने के लिए नगर पालिका को पूर्व में लिखित आवेदन दिया गया है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।"
*प्रमिला सावले, प्राचार्य, शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, आमला*
"मैं नगर पालिका से बात कर रहा हूं। सोमवार तक विद्यालय में पानी की व्यवस्था कराने का प्रयास किया जाएगा।"
*धीरेंद्र साहू, बीईओ, आमला*
"नगर पालिका के सीएमओ को निर्देश दे दिए गए हैं। विद्यालय में पुनः 24 घंटे वाला जल कनेक्शन लगाया जाएगा, ताकि छात्राओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।"
*शैलेंद्र बड़ोनिया, एसडीएम, आमला*
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