आमला। आमला-सारणी विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में इन दिनों निशा बांगरे की बढ़ती सक्रियता ने सियासी हलचल तेज कर दी है। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर निशा बांगरे अपने छह माह के बच्चे को साथ लेकर विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों में पहुंचीं। उन्होंने ग्रामीणों, सामाजिक लोगों और अपने समर्थकों से आत्मीय मुलाकात की। उनकी इस सक्रियता को लेकर अब क्षेत्र के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

निशा बांगरे की क्षेत्र में लगातार बढ़ती मौजूदगी को महज सामाजिक सक्रियता नहीं, बल्कि संभावित राजनीतिक गतिविधियों के नजरिए से भी देखा जा रहा है। विश्व आदिवासी दिवस के कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी और अलग-अलग गांवों में लोगों से सीधा संवाद चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।

*गांव-गांव संपर्क, समर्थकों में उत्साह*

निशा बांगरे के जनसंपर्क के दौरान युवाओं और समर्थकों में खासा उत्साह देखने को मिला। स्थानीय लोगों से मुलाकात के दौरान उन्होंने क्षेत्र की परिस्थितियों और सामाजिक मुद्दों को समझने का प्रयास किया। उनकी सहज मौजूदगी और लोगों के बीच संवाद को लेकर समर्थकों में भी नई ऊर्जा दिखाई दे रही है।

राजनीतिक जानकारों की नजर में आमला-सारणी विधानसभा क्षेत्र में किसी भी नए राजनीतिक चेहरे की सक्रियता सीधे तौर पर चर्चा का विषय बन जाती है। ऐसे में निशा बांगरे की लगातार बढ़ती सक्रियता ने स्थानीय राजनीति में संभावनाओं और नए समीकरणों को लेकर अटकलों को हवा दे दी है।

*घोषणा नहीं, लेकिन सक्रियता ने बढ़ाई धड़कन*

हालांकि निशा बांगरे ने अभी तक अपनी आगामी राजनीतिक भूमिका को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की है। इसके बावजूद उनका लगातार क्षेत्र में पहुंचना, सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेना और लोगों से संपर्क बढ़ाना राजनीतिक संकेतों के रूप में देखा जा रहा है।

आमला-सारणी की राजनीति में आने वाले समय में क्या नए समीकरण बनते हैं, यह तो भविष्य बताएगा, लेकिन फिलहाल निशा बांगरे की बढ़ती सक्रियता ने राजनीतिक तापमान जरूर बढ़ा दिया है। अब नजर इस बात पर है कि उनकी यह सक्रियता केवल सामाजिक जनसंपर्क तक सीमित रहती है या आने वाले दिनों में इसे कोई स्पष्ट राजनीतिक दिशा मिलती है।

*इनका कहना है*

“पार्टी यदि मुझे टिकट देती है तो मैं चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हूं। लेकिन चुनाव केवल टिकट से नहीं जीता जाता, इसके लिए सबसे जरूरी है जनता का विश्वास, समर्थन और आशीर्वाद। मैं लगातार आमला-सारणी क्षेत्र की जनता के बीच पहुंच रही हूं और उनके सुख-दुख में सहभागी बनने का प्रयास कर रही हूं। मेरा उद्देश्य जनता की आवाज को मजबूती से उठाना और क्षेत्र के विकास के लिए काम करना है। पार्टी का निर्णय सर्वोपरि है, लेकिन यदि अवसर मिला तो मैं पूरी ताकत और ईमानदारी के साथ चुनाव मैदान में उतरूंगी। मुझे भरोसा है कि जनता का साथ और आशीर्वाद जरूर मिलेगा।”

*निशा बांगरे, पूर्व डिप्टी कलेक्टर*