आमला। बैतूल जिले के दो अलग-अलग थाना क्षेत्रों में महिलाओं से जुड़े गंभीर मामलों में पुलिस की कार्रवाई की रफ्तार को लेकर अब आमजन के बीच सवाल उठने लगे हैं। एक ओर बोरदेही थाना पुलिस ने दहेज प्रताड़ना से जुड़ी नवविवाहिता कुंतीबाई की संदिग्ध मौत के मामले में एफआईआर दर्ज होने के महज पांच दिनों के भीतर पति सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर दिया, वहीं दूसरी ओर आमला के चर्चित रंजिता प्रताड़ना कांड में 18 दिन बीत जाने के बाद भी किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय से जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, बोरदेही पुलिस ने मामला दर्ज होते ही विवेचना तेज की, आरोपियों के संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी और फरार तीनों आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की। पुलिस की इस कार्रवाई को त्वरित और प्रभावी बताते हुए इसकी सराहना भी की जा रही है।
इसके विपरीत आमला थाना क्षेत्र के चर्चित रंजिता प्रताड़ना मामले में अब तक गिरफ्तारी नहीं होने से लोगों में असंतोष दिखाई दे रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब दोनों ही मामले महिलाओं के विरुद्ध गंभीर अपराधों से जुड़े हैं, तो कार्रवाई की गति में इतना बड़ा अंतर क्यों दिखाई दे रहा है।
मृतका रंजिता के परिजनों ने पहले भी आरोप लगाया था कि पुलिस ने समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की और आरोपियों को पकड़ने में अपेक्षित तत्परता नहीं दिखाई। समय बीतने के बावजूद गिरफ्तारी नहीं होने से अब यह मामला जनचर्चा का विषय बन गया है।
*आखिर क्यों उठ रहे हैं सवाल?*
-दोनों मामलों की तुलना के बाद लोगों के मन में कई सवाल लगातार उठ रहे हैं—
*जब बोरदेही पुलिस पांच दिन में तीन आरोपियों तक पहुंच सकती है, तो आमला पुलिस 18 दिन बाद भी गिरफ्तारी क्यों नहीं कर सकी?
*क्या दोनों मामलों में पुलिस की प्राथमिकताएं अलग-अलग रहीं?
*क्या आमला पुलिस के सामने जांच से जुड़ी कोई विशेष कानूनी या तकनीकी बाधा है?
*यदि ऐसी कोई बाधा है, तो उसकी जानकारी सार्वजनिक रूप से अब तक क्यों नहीं दी गई?
*आखिर आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी की वास्तविक वजह क्या है?
हालांकि, यह भी सच है कि प्रत्येक आपराधिक मामले के तथ्य, उपलब्ध साक्ष्य, जांच की दिशा और परिस्थितियां अलग-अलग हो सकती हैं। इन्हीं कारणों से किसी मामले में गिरफ्तारी शीघ्र होती है तो किसी में अधिक समय लग सकता है। इसलिए केवल समय के आधार पर दोनों मामलों की जांच की गुणवत्ता का अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
फिर भी, आमला पुलिस की ओर से अब तक गिरफ्तारी में हो रही देरी को लेकर कोई विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। ऐसे में स्वाभाविक रूप से लोगों के बीच सवाल उठ रहे हैं और पारदर्शिता की अपेक्षा भी बढ़ रही है।
अब पूरे मामले पर आमजन की निगाहें आमला पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि शीघ्र गिरफ्तारी नहीं होती है या पुलिस की ओर से स्थिति स्पष्ट नहीं की जाती, तो पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवाल और तेज हो सकते हैं।
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