मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में कृषि और किसानों के कल्याण को हमेशा से ही सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती रही है। इसी कड़ी में विदिशा जिले के ग्रामीण अंचलों में सोयाबीन की फसल की वर्तमान स्थिति और उसमें लगने वाले कीटों के प्रकोप पर पैनी नजर रखी जा रही है। विदिशा जिले के कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता के सख्त और स्पष्ट निर्देशों के अनुसार, पूरे जिले में लगातार यह मॉनिटरिंग की जा रही है कि किसानों की फसल सुरक्षित रहे और उन्हें किसी भी प्रकार की प्राकृतिक या कीट जनित आपदा से बचाया जा सके। इसी अभियान के तहत शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को ग्यारसपुर अनुविभाग के अंतर्गत आने वाले विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक अमले ने औचक निरीक्षण किया। इस दौरान स्थानीय किसानों की समस्याओं को नजदीक से समझने और उनका तुरंत समाधान करने के प्रयास किए गए।

संतापुर और खुजरार गांवों में खेतों का दौरा

कलेक्टर के निर्देशों का पालन करते हुए ग्यारसपुर अनुविभाग की एसडीएम श्रीमती शशि मिश्रा और स्थानीय तहसीलदार ने संयुक्त रूप से एक विशेष दौरा किया। इस प्रशासनिक टीम ने विदिशा जिले के ग्राम संतापुर और खुजरार में पहुंचकर सीधे किसानों के खेतों का मुआयना किया। अधिकारियों ने दूर से स्थिति देखने के बजाय खेतों के अंदर तक जाकर सोयाबीन की लहलहाती फसल की जमीनी हकीकत का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने फसल की वृद्धि, पत्तों की स्थिति और कीटों के संभावित हमलों की बारीकी से जांच की। अधिकारियों के इस तरह खेतों में पहुंचकर फसल का निरीक्षण करने से स्थानीय किसानों में भी यह विश्वास जगा कि प्रशासन उनकी मेहनत और समस्याओं के प्रति पूरी तरह से संवेदनशील और गंभीर है।

किसानों से सीधी चर्चा और फसल सुरक्षा पर संवाद

खेतों के निरीक्षण के दौरान एसडीएम श्रीमती शशि मिश्रा और तहसीलदार ने वहां मौजूद किसानों से आमने-सामने लंबी बातचीत की। अधिकारियों ने किसानों से पूछा कि इस वर्ष मानसून की स्थिति और मौसम के बदलाव के बाद उनकी सोयाबीन की फसल कैसी चल रही है। किसानों से यह भी जानकारी ली गई कि क्या उनके खेतों में किसी विशेष प्रकार के कीट या सुंडी का प्रकोप दिखाई दे रहा है या नहीं। किसानों ने अधिकारियों को अपनी फसल की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया। इसके साथ ही, अधिकारियों ने किसानों को आश्वस्त किया कि सरकार और प्रशासन हर कदम पर उनके साथ खड़े हैं। किसानों को यह भी समझाया गया कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों या बिना डॉक्टर की सलाह के बाजार में मिलने वाले अंधाधुंध रसायनों का प्रयोग करने से बचें।

कृषि विशेषज्ञों की सलाह और अनुशंसित दवाओं का महत्व

निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों को तकनीकी और वैज्ञानिक सलाह भी दी। अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से निर्देश देते हुए कहा कि यदि सोयाबीन की फसल में किसी भी प्रकार के कीट, इल्ली या अन्य अज्ञात रोगों के शुरुआती लक्षण दिखाई दें, तो किसान भाई तुरंत अपने नजदीकी कृषि विभाग के मैदानी अमले या ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क करें। बिना सोचे-समझे या अपनी मर्जी से कोई भी कीटनाशक छिड़कने के बजाय कृषि विशेषज्ञों की वैज्ञानिक सलाह का ही पालन किया जाना चाहिए। विशेषज्ञों द्वारा अनुशंसित और प्रमाणित कीटनाशकों तथा दवाओं का ही सही मात्रा में उपयोग किया जाना चाहिए, ताकि फसल को भी नुकसान न पहुंचे और अनावश्यक आर्थिक खर्च से भी बचा जा सके।

अधिकारियों को सख्त निर्देश और सतत निगरानी के आदेश

निरीक्षण का यह दौर केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं था, बल्कि ग्यारसपुर की एसडीएम श्रीमती शशि मिश्रा ने मौके पर मौजूद संबंधित विभागों के मैदानी अधिकारियों को भी बेहद कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्यारसपुर अनुविभाग के अंतर्गत आने वाले सभी गांवों में सोयाबीन की फसल की स्थिति पर लगातार और निरंतर निगरानी रखी जानी चाहिए। किसानों को समय-समय पर फसल सुरक्षा, मौसम से बचाव और कीट नियंत्रण संबंधी तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराना विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी है। एसडीएम ने जोर देकर कहा कि किसानों की किसी भी समस्या का समाधान कागजों पर नहीं, बल्कि मौके पर जाकर परीक्षण करने के बाद त्वरित और आवश्यक कार्रवाई के साथ सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

राजस्व अमले की उपस्थिति और किसानों से विशेष अपील

इस संयुक्त निरीक्षण अभियान के दौरान स्थानीय राजस्व विभाग और कृषि तथा अन्य संबंधित विभागों का पूरा मैदानी अमला मुस्तैदी से साथ मौजूद रहा। प्रशासनिक अधिकारियों ने अंत में सभी ग्रामीण किसानों से एक बहुत ही महत्वपूर्ण अपील की। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी किसान के खेत में फसल की स्थिति असामान्य दिखाई देती है, या अचानक से कोई भयंकर कीट प्रकोप या रोग फैलता है, तो वे बिना किसी देरी के इसकी सूचना तुरंत संबंधित प्रशासनिक या कृषि विभाग को दें। सही समय पर सही सूचना मिलने से प्रशासन तुरंत आवश्यक उपाय और नियंत्रण के कदम उठा सकेगा, जिससे किसानों की मेहनत की फसल को बचाया जा सके। इस पूरी प्रशासनिक पहल से विदिशा जिले के किसानों में जागरूकता बढ़ी है और उन्हें अपनी फसल की सुरक्षा के प्रति एक नया संबल मिला है।

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