मध्य प्रदेश के कटनी जिले में संस्कृति, आस्था और पर्यावरण संरक्षण का एक अनूठा संगम देखने को मिला है। जिले के अंतर्गत आने वाले पठरा गांव में स्थित मानव जीवन विकास समिति द्वारा संचालित बजरंग गौशाला गोकुल आश्रम पठरा में श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व बेहद धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस विशेष अवसर पर गौमाता के पूजन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर पौधरोपण कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। इस धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम में आसपास के ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का आनंद लेते हुए गौमाता का आशीर्वाद प्राप्त किया।

अतिथियों की उपस्थिति और गौमाता की पूजा-अर्चना

यह पूरा भव्य कार्यक्रम समिति के सचिव एवं जाने-माने पर्यावरणविद् श्री निर्भय सिंह के कुशल नेतृत्व में आयोजित किया गया। इस आयोजन को सफल बनाने में पशुपालन एवं डेयरी विभाग कटनी तथा बड़वारा के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. आत्मानंद मिश्रा का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि के रूप में पठरा के उपसरपंच श्री अनिल सिंह ने शिरकत की। मुख्य अतिथि ने विधि-विधान के साथ गौमाता की पूजा-अर्चना की, उन्हें सुंदर फूलमालाएं पहनाईं और बड़े प्रेम से फलाहार कराया। इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान पूरा गौशाला परिसर भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों और भक्तिमय माहौल से गूंज उठा।

पौधरोपण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के धार्मिक महत्व के साथ-साथ इस आयोजन का एक बड़ा उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण भी था। गौमाता के पूजन के तुरंत बाद गौशाला परिसर और उसके आसपास के खुले स्थानों पर विभिन्न प्रकार के छायादार और फलदार पौधों का रोपण किया गया। समिति सचिव श्री निर्भय सिंह ने इस दौरान उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन और उनका दर्शन प्रकृति, जीव-जंतुओं और विशेषकर गौमाता के प्रति अगाध प्रेम का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जन्माष्टमी के पावन पर्व पर गौमाता पूजन के साथ पौधरोपण करना समाज में यह संदेश देता है कि हमें अपनी संस्कृति के साथ-साथ प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा का भी संकल्प लेना चाहिए।

भगवान श्रीकृष्ण और गौमाता का गहरा संबंध

अपने संबोधन में श्री निर्भय सिंह ने भगवान श्रीकृष्ण और गौमाता के ऐतिहासिक तथा आध्यात्मिक संबंधों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण को प्रेम से 'गोपाल' और 'गोविंद' के नामों से पुकारा जाता है, जिसका शाब्दिक अर्थ गायों का रक्षक और उनका पालनहार होता है। भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण बालकाल गोकुल और वृंदावन में गायों और ग्वालों के बीच ही बीता था। उन्होंने समाज के सामने हमेशा गौ-सेवा और गौ-संरक्षण के सर्वोच्च आदर्श को स्थापित किया। भगवान श्रीकृष्ण ने ही गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठाकर भारी बारिश से गायों और गोकुल वासियों की रक्षा की थी, जो इस बात का प्रमाण है कि सनातन संस्कृति में जीव-सेवा का कितना बड़ा स्थान है।

ग्रामीणों की सक्रिय सहभागिता और उपस्थिति

इस गरिमाममय और पवित्र कार्यक्रम में कटनी जिले के पठरा गांव के स्थानीय नागरिकों और युवाओं ने बढ़-चढ़कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और अपनी सहभागिता सुनिश्चित की। कार्यक्रम के दौरान ग्राम पंचायत के रोजगार सहायक श्री सुशील कुशवाहा विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा राहुल कुशवाहा, पूनम शर्मा, चंद्रपाल कुशवाहा, रामकिशोर चौधरी, ओमप्रकाश यादव, गुलशन सिंह, रमेश साहू, रामसखा पाल, और फग्गू केवट सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन और महिलाएं मौजूद थीं। सभी ने मिलकर गौमाता को चारा खिलाया, पौधरोपण किया और एक-दूसरे को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की बधाइयां दीं। इस आयोजन से पूरे गांव में एक सकारात्मक और धार्मिक ऊर्जा का संचार हुआ है।

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