विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर 14 जून 2026 को बालाघाट के भरवेली स्थित 123वीं बटालियन केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) परिसर में एक भव्य रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर न केवल स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था, बल्कि जरूरतमंद मरीजों के लिए जीवन रक्षक रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में एक मानवीय प्रयास भी था। रक्तदान को महादान माना जाता है, और सीआरपीएफ के जवानों ने इस भावना को चरितार्थ करते हुए बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

रक्तदान के प्रति जागरूकता का संकल्प

कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत वाहिनी के कमांडेंट श्री हजारी लाल द्वारा की गई। उन्होंने शिविर में उपस्थित सभी अधिकारियों और जवानों को रक्तदान के महत्व के प्रति शपथ दिलाई। श्री हजारी लाल ने अपने संबोधन में कहा कि रक्तदान मानवता की सेवा का सबसे श्रेष्ठ माध्यम है। एक यूनिट रक्त किसी जरूरतमंद के लिए जीवन की नई किरण बन सकता है। उन्होंने सभी जवानों का आह्वान किया कि वे न केवल स्वयं रक्तदान करें, बल्कि समाज में भी इस नेक कार्य के प्रति लोगों को जागरूक करें। उनका उद्देश्य समाज में स्वैच्छिक और निःशुल्क रक्तदान की संस्कृति को मजबूत करना था, ताकि रक्त की कमी से होने वाली मौतों को रोका जा सके।

सुरक्षित एवं व्यवस्थित रक्त संग्रहण प्रक्रिया

इस रक्तदान शिविर को सफल बनाने के लिए रेडक्रॉस सोसायटी, जिला अस्पताल बालाघाट की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चिकित्सकीय देखरेख में रक्त संग्रहण की प्रक्रिया को अत्यंत सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराया गया। सीआरपीएफ के अधिकारियों एवं जवानों ने उत्साहपूर्वक अपनी भागीदारी सुनिश्चित की। शिविर के दौरान सभी आवश्यक चिकित्सकीय मानकों का पूरी तरह से पालन किया गया, जिससे रक्तदाताओं को कोई असुविधा न हो।

जवानों का उत्साहवर्धन एवं सम्मान

रक्तदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद, कमांडेंट श्री हजारी लाल ने व्यक्तिगत रूप से सभी रक्तदाताओं का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने रक्तदाताओं को फल और पोषक पेय पदार्थ वितरित किए। कमांडेंट ने जवानों की सेवा भावना की सराहना करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में सीमाओं की सुरक्षा करने के साथ-साथ, सीआरपीएफ के जवान सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने में भी सदैव तत्पर रहते हैं। यह शिविर उनकी इसी सेवा भावना का प्रमाण है।

वरिष्ठ अधिकारियों और चिकित्सा टीम की उपस्थिति

कार्यक्रम को सफल बनाने में वाहिनी के वरिष्ठ अधिकारियों और चिकित्सा विशेषज्ञों का विशेष योगदान रहा। इस अवसर पर वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. चन्द्रशेखर पटेल, सहायक कमांडेंट श्री रामजस यादव, निरीक्षक जय कुमार, लैब इंचार्ज श्री सुरेन्द्र कुमार नागपोरे, और नर्सिंग अधिकारी श्रीमती वैशाली डोंगरे सहित पूरी चिकित्सा टीम उपस्थित थी। उनकी देखरेख में शिविर का संचालन सुचारू रूप से हुआ। वाहिनी के अन्य अधिकारी और जवान भी इस दौरान बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और उन्होंने शिविर को एक सफल आयोजन बनाने में सहयोग दिया।

मानव जीवन बचाने का संदेश

123वीं बटालियन सीआरपीएफ के इस रक्तदान शिविर ने न केवल बड़ी मात्रा में रक्त संग्रहण किया, बल्कि बालाघाट और आसपास के क्षेत्रों के लिए एक प्रेरणादायक संदेश भी छोड़ा। शिविर ने स्पष्ट किया कि स्वैच्छिक रक्तदान एक नागरिक कर्तव्य है। सीआरपीएफ के इस प्रयास ने एक बार फिर समाज के प्रति बल की संवेदनशीलता और जनसेवा के उनके अटूट संकल्प को प्रदर्शित किया। आने वाले समय में भी इस प्रकार के शिविरों के माध्यम से जरूरतमंदों तक समय पर रक्त पहुंचाने का प्रयास निरंतर जारी रहेगा। यह आयोजन इस बात का प्रतीक है कि जब वर्दी के रक्षक समाज सेवा का संकल्प लेते हैं, तो वे हर प्रकार की चुनौती का सामना करने के लिए तैयार रहते हैं।

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