बालाघाट: मध्य प्रदेश शासन के पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा संचालित 'दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान' का तृतीय चरण जिले में पूरी गति के साथ जारी है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अंचल के पशुपालकों को आधुनिक और वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों से जोड़ना है। इसी क्रम में, बुधवार, 15 जुलाई 2026 को बालाघाट विकासखंड के दूरस्थ ग्राम खैरगांव एवं नगरवाड़ा में एक विशेष गृह-भेंट और पशुपालक संपर्क कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

पशुपालकों से सीधा संवाद और वैज्ञानिक दृष्टिकोण

इस संपर्क कार्यक्रम के दौरान पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने गांवों में जाकर पशुपालकों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया। अधिकारियों ने पशुपालकों को प्रोत्साहित करते हुए समझाया कि पारंपरिक तरीकों के साथ आधुनिक तकनीकों का समावेश किस प्रकार उनकी आय में वृद्धि का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से निम्नलिखित वैज्ञानिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई:

  • पशु स्वास्थ्य प्रबंधन: समय पर टीकाकरण और बीमारियों से बचाव के उपाय।

  • नस्ल सुधार: बेहतर नस्ल के पशुओं के चयन और उनकी देखरेख की विधि।

  • संतुलित पशु आहार: पशुओं के शारीरिक विकास और दुग्ध उत्पादन की गुणवत्ता के लिए पोषण युक्त चारे का महत्व।

  • स्वच्छ पशुपालन: दूध की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए पशुशाला में स्वच्छता और रखरखाव की तकनीकें।

गोरस ऐप: डिजिटल तकनीक से आत्मनिर्भर बनते पशुपालक

इस अभियान का एक प्रमुख आकर्षण 'गोरस ऐप' की जानकारी देना रहा। विभागीय अधिकारियों ने पशुपालकों को इस ऐप का उपयोग करना सिखाया। उन्होंने बताया कि इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से पशुपालक अब स्वयं अपने पशुओं के लिए आवश्यक संतुलित आहार की गणना कर सकते हैं। यह ऐप न केवल पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार लाने में मदद करता है, बल्कि दुग्ध उत्पादन को भी अधिकतम स्तर तक ले जाने में सहायक है। पशुपालकों ने इस तकनीकी सुविधा में विशेष रुचि दिखाई।

आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम

पशुपालन विभाग ने स्पष्ट किया कि दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान का मूल मंत्र 'पशुपालकों की आय में दोगुनी वृद्धि' है। विभाग के अनुसार, यदि पशुपालक इन वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाते हैं, तो उनके पशुओं की उत्पादकता में उल्लेखनीय सुधार होगा, जिससे वे आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बनेंगे। कार्यक्रम के दौरान पशुपालकों की समस्याओं को भी सुना गया और विभागीय अधिकारियों द्वारा उनके निराकरण के लिए आवश्यक परामर्श दिया गया।

विभागीय अधिकारियों की उपस्थिति

इस महत्वपूर्ण संपर्क कार्यक्रम में पशुपालन विभाग के विशेषज्ञ अधिकारियों की टीम मौजूद रही, जिसमें डॉ. पंकज पुशाम (खंड पशु चिकित्सा अधिकारी, बालाघाट), श्री देवेश पटले (सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी) तथा श्री अंकित भगत (गौमैत्री) शामिल थे। इन अधिकारियों ने घर-घर जाकर पशुपालकों को विभाग की योजनाओं के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी और उन्हें योजनाओं का लाभ उठाने हेतु प्रेरित किया।

बालाघाट जिले में आयोजित इस कार्यक्रम ने ग्रामीण पशुपालकों में एक नई ऊर्जा का संचार किया है। विभाग का प्रयास है कि आने वाले समय में अभियान को और अधिक विस्तार दिया जाए ताकि हर एक पशुपालक तक आधुनिक सुविधाएं पहुंच सकें।

Image Source: https://balaghat.mpinfo.org