अखण्ड यादव टीकमगढ़  बल्देवगढ़। शिक्षा को सेवा नहीं बल्कि कमाई का जरिया बनाने के आरोपों के बीच नगर के समीप कैलपुरा स्थित बेस्ट फ्यूचर इंग्लिश मीडियम स्कूल एक बार फिर विवादों में है। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन मासूम बच्चों की शिक्षा को मुनाफे का माध्यम बनाकर मनमानी फीस वसूल रहा है और अभिभावकों को अपनी ही दुकान से मनमाने दामों पर किताबें खरीदने के लिए मजबूर कर रहा है। विरोध करने पर कथित रूप से दो टूक जवाब दिया जाता है—"लेना है तो लो, नहीं तो अपने बच्चों को मत पढ़ाओ।"

अभिभावकों का कहना है कि स्कूल में दाखिला लेने के बाद उन्हें किसी अन्य दुकान से किताबें खरीदने की स्वतंत्रता नहीं दी जाती। स्कूल से जुड़े विक्रेता से ही किताबें खरीदने का दबाव बनाया जाता है, जहां किताबों के दाम सामान्य बाजार से कहीं अधिक बताए जाते हैं।

सिर्फ कक्षा-1 की किताबें 3500 रुपये, अभिभावकों में भारी नाराजगी

अभिभावकों के अनुसार कक्षा-1 के एक छात्र की केवल किताबों का सेट ही लगभग 3,500 रुपये में दिया गया। उनका आरोप है कि इन किताबों की कीमत वास्तविक बाजार मूल्य से कहीं अधिक है। इससे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। उनका कहना है कि स्कूल प्रबंधन शिक्षा के नाम पर अभिभावकों की मजबूरी का फायदा उठा रहा है।

4.43 लाख रुपये अधिक फीस वसूली का मामला पहले भी आया था सामने

यह पहला अवसर नहीं है जब स्कूल पर इस प्रकार के आरोप लगे हों। पिछले वर्ष बीआरसीसी राहुल त्रिपाठी द्वारा की गई जांच में कथित रूप से यह पाया गया था कि स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों से लगभग 4 लाख 43 हजार रुपये निर्धारित शुल्क से अधिक वसूले थे। जांच प्रतिवेदन आगे की कार्रवाई के लिए एसडीएम को सौंपा गया था, ताकि अतिरिक्त वसूली गई राशि वापस कराई जा सके और नियमानुसार कार्रवाई हो सके।

हालांकि अभिभावकों का आरोप है कि आज तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि कार्रवाई के अभाव में स्कूल प्रबंधन के हौसले और बढ़ गए हैं तथा मनमानी फीस और किताबों की बिक्री का सिलसिला पहले की तरह जारी है।

किताबों के नाम पर कमीशन का खेल?

अभिभावकों का आरोप है कि किताबों के प्रिंट रेट से अधिक कीमत वसूली जा रही है और निजी स्कूलों एवं पुस्तक विक्रेताओं की कथित मिलीभगत से शिक्षा को कारोबार बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि अभिभावक बाहर से किताबें खरीदने की बात करें तो उन्हें हतोत्साहित किया जाता है और स्कूल से ही खरीदने का दबाव बनाया जाता है।

कार्रवाई नहीं होने से बढ़ रहे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब पिछले वर्ष जांच में कथित अनियमितताएं सामने आने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, तो इससे अन्य निजी स्कूलों को भी गलत संदेश गया है। उनका मानना है कि प्रशासन की सख्ती के अभाव में निजी स्कूल मनमानी करने का साहस जुटा रहे हैं।

कलेक्टर से जिलेभर के निजी स्कूलों की जांच की मांग

अभिभावकों और नागरिकों ने कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी टीकमगढ़ से मांग की है कि जिले के सभी निजी स्कूलों में फीस, किताबों की अनिवार्य बिक्री, यूनिफॉर्म और अन्य शुल्कों की व्यापक जांच कराई जाए। यदि कोई स्कूल नियमों का उल्लंघन करता पाया जाए तो उसके विरुद्ध सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाए, ताकि शिक्षा के नाम पर अभिभावकों के आर्थिक शोषण पर रोक लग सके और बच्चों का भविष्य सुरक्षित रह सके।