बालाघाट जिले के बिरसा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत जैरासी के बैगा जनजाति बहुल गांव 'पंड्रापानी' में 14 जून 2026 को एक महत्वपूर्ण जन समस्या निवारण शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर समाधान करना और उन्हें सरकारी योजनाओं की जानकारी देकर सशक्त बनाना था। शिविर में क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ संवाद किया।

अतिथियों की उपस्थिति एवं बीज वितरण

कार्यक्रम में मध्य प्रदेश अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य श्री भगत नेताम ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित ग्रामीणों को शासन की जनकल्याणकारी नीतियों के बारे में विस्तार से बताया। शिविर के दौरान कृषि विभाग की ओर से किसानों को प्रोत्साहित करते हुए उन्नत बीज वितरित किए गए। ग्राम पंचायत जैरासी के सरपंच की उपस्थिति में, कृषक श्री मुंगेल सिंह और श्री महेंद्र सिंह उईके को अरहर की उन्नत किस्म 'भीमा' के बीज प्रदान किए गए। अरहर की यह उन्नत किस्म किसानों की आय बढ़ाने और बेहतर पैदावार सुनिश्चित करने में सहायक सिद्ध होगी।

आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रचार

शिविर में कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को खरीफ सीजन के लिए पूरी तरह तैयार रहने का आह्वान किया। अधिकारियों ने विशेष रूप से 'डायरेक्ट सीडेड राइस' (DSR) पद्धति पर प्रकाश डाला। उन्होंने किसानों को समझाया कि डी.एस.आर. तकनीक न केवल पानी की खपत को कम करती है, बल्कि इसमें श्रम और लागत की भी काफी बचत होती है। समय पर बुवाई करने से बेहतर उत्पादन की संभावना बढ़ जाती है, जो जिले की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत लाभकारी है।

किसानों को 'नरवाई प्रबंधन' (Crop Residue Management) के प्रति भी जागरूक किया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिए कि फसल के अवशेषों (नरवाई) को जलाने से पर्यावरण को नुकसान होता है और मिट्टी की उपजाऊ शक्ति भी घटती है। इसके स्थान पर अवशेषों को वैज्ञानिक तरीके से खेत में ही प्रबंधित करने की सलाह दी गई, ताकि भूमि का स्वास्थ्य बना रहे और आगामी फसल के लिए मिट्टी अधिक पोषक बनी रहे।

प्रशासन और ग्रामीण जनता के बीच संवाद

जन समस्या निवारण शिविर संवाद का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा। ग्रामीणों ने अपनी व्यक्तिगत और सामुदायिक समस्याओं को अधिकारियों के समक्ष रखा। इनमें बुनियादी सुविधाओं, सरकारी योजनाओं के लाभ और कृषि संबंधी चुनौतियां प्रमुख थीं। अधिकारियों ने सभी समस्याओं को गंभीरता से सुना और संबंधित विभागों को तत्काल निराकरण करने के निर्देश दिए।

शिविर में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, विभाग के अधिकारियों और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे। ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि गांव स्तर पर इस तरह के आयोजन होने से न केवल सरकारी योजनाओं की सटीक जानकारी मिलती है, बल्कि उनकी समस्याओं का समाधान भी त्वरित गति से हो पाता है। प्रशासन का यह कदम दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में शासन की उपस्थिति और संवेदनशीलता को दर्शाता है।

सतत कृषि और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प

यह शिविर न केवल बीज वितरण या समस्याओं के समाधान तक सीमित रहा, बल्कि इसने किसानों को प्राकृतिक खेती और उन्नत तकनीकों के प्रति एक नई दिशा भी दिखाई। बैगा जनजाति जैसे संवेदनशील समुदायों के बीच जाकर उन्हें आधुनिक कृषि पद्धतियों से जोड़ना सरकार की 'अंत्योदय' की भावना के अनुरूप है। भविष्य में भी इस प्रकार के शिविरों के आयोजन से कृषि के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता आएगी और ग्रामीण विकास की गति को और अधिक बल मिलेगा।

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