आमला। आमला ब्लॉक के ग्राम देवठान में शुक्रवार दोपहर बिजली विभाग की कथित लापरवाही के चलते भीषण आगजनी की घटना सामने आई, जिसमें किसानों की लाखों रुपए की गेहूं की फसल जलकर राख हो गई।
घटना में किसान नीलम सिंह राजपूत की लगभग डेढ़ एकड़ गेहूं की फसल और पड़ोसी किसान की लगभग एक एकड़ फसल जलकर नष्ट हो गई।
किसानों ने इस पूरे मामले के लिए मध्य प्रदेश विद्युत मंडल के सुपरवाइजर विजय उइके, लाइनमैन महेश पवार और सुदामा पवार को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ कड़ी प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
*दोपहर 12:30 बजे ट्रांसफार्मर में हुआ शॉर्ट सर्किट, खेत में लगी आग*
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार दोपहर करीब 12:30 बजे किसान नीलम सिंह राजपूत के खेत में लगे ट्रांसफार्मर और खुले तारों में शॉर्ट सर्किट हुआ, जिससे निकली चिंगारी ने पास खड़ी गेहूं की फसल को अपनी चपेट में ले लिया।
कुछ ही देर में आग ने विकराल रूप ले लिया और देखते ही देखते करीब ढाई एकड़ फसल जलकर राख हो गई।
*पहले से थी आशंका, फिर भी नहीं चेता बिजली विभाग*
पीड़ित किसान नीलम सिंह राजपूत और उनके परिवार का आरोप है कि वे पिछले करीब 5 वर्षों से बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने खेत में लगे पुराने ट्रांसफार्मर और खुले तारों की समस्या से अवगत करा रहे थे।
उन्होंने कई बार ट्रांसफार्मर हटाने, तार बदलने या केबल डालने की मांग की, लेकिन हर बार उनकी शिकायत को नजरअंदाज कर दिया गया।
किसान की पत्नी पिकी राजपूत ने भी बताया कि घटना से तीन दिन पहले उन्होंने सुपरवाइजर विजय उइके को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी थी कि ट्रांसफार्मर के तार खुले हैं और कभी भी शॉर्ट सर्किट होकर खेत में आग लग सकती है।
इसके बावजूद विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई।
*लाइन बंद करने की सूचना देने पर भी नहीं पहुंचे अधिकारी*
घटना के समय जैसे ही ट्रांसफार्मर से आग की लपटें उठीं और खेत में आग फैलने लगी, किसान नीलम सिंह ने तुरंत सुपरवाइजर विजय उइके को फोन कर बिजली लाइन बंद करने की सूचना दी।
आरोप है कि इसके बावजूद न तो समय पर लाइन बंद की गई और न ही विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचे।
किसानों का कहना है कि यदि समय पर बिजली सप्लाई बंद कर दी जाती और विभाग मौके पर पहुंचता, तो नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता था।
*आग बुझाने दौड़े किसान, पानी की कमी से नहीं पाया काबू*
आग लगते ही आसपास के किसान और ग्रामीण मौके पर पहुंचे और अपने स्तर पर आग बुझाने का प्रयास किया।
लेकिन खेतों में पर्याप्त पानी और अग्निशमन संसाधन उपलब्ध नहीं होने के कारण आग पर समय रहते काबू नहीं पाया जा सका।
बाद में किसान द्वारा डायल 112 को भी सूचना दी गई, लेकिन तब तक फसल का बड़ा हिस्सा जलकर राख हो चुका था।
*आग में झुलसे किसान परिवार के सदस्य*
इस घटना में केवल फसल ही नहीं जली, बल्कि आग की चपेट में आने से किसान नीलम सिंह की पत्नी, बड़ी बेटी और पड़ोसी किसान भी झुलस गए।
बताया जा रहा है कि इस संबंध में थाना आमला में शिकायत भी दर्ज कराई गई है।
*एक-दो नहीं, कई किसान हो चुके हैं नुकसान के शिकार*
स्थानीय किसानों का आरोप है कि यह कोई पहली घटना नहीं है।
आमला क्षेत्र में मध्य प्रदेश विद्युत मंडल की लापरवाही के कारण रबी सीजन में एक दर्जन से अधिक किसानों की गेहूं और चने की फसलें ट्रांसफार्मर और बिजली तारों में शॉर्ट सर्किट होने से जल चुकी हैं।
किसानों का कहना है कि विभाग द्वारा लगातार पुराने तार, जर्जर केबल और खराब ट्रांसफार्मर को बदलने की मांग के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा।
हर बार घटना के बाद अधिकारी केवल “शॉर्ट सर्किट” कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं और किसानों को ऊंट के मुंह में जीरा जैसा मुआवजा देकर मामला खत्म कर दिया जाता है।
*फसल बीमा की बात अलग, सुरक्षा व्यवस्था शून्य*
किसानों ने सवाल उठाया है कि एक तरफ शासन किसानों को फसल बीमा और मुआवजा देने की बात करता है, वहीं दूसरी ओर खेतों में लगे खुले बिजली तार, जर्जर ट्रांसफार्मर और असुरक्षित लाइनें किसानों की मेहनत को हर साल आग के हवाले कर रही हैं।
यदि समय रहते बिजली विभाग ने केबल लाइन, सुरक्षित तार और ट्रांसफार्मर की मरम्मत कराई होती, तो इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता था।
*किसानों की मांग: नुकसान की भरपाई और दोषियों पर कार्रवाई हो*
पीड़ित किसान नीलम सिंह राजपूत और अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि—
जली हुई फसल का पूरा मुआवजा दिया जाए,
यह मुआवजा संबंधित सुपरवाइजर और लाइनमैन से वसूला जाए,
जिम्मेदार कर्मचारियों को तत्काल निलंबित किया जाए,
और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
किसानों ने कहा कि यदि इस मामले में कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में भी किसानों की फसलें इसी तरह विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ती रहेंगी।

Continue With Google
Comments (0)