आमला। मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत आमला जनपद पंचायत में आवेदन तो लिए जा रहे हैं, लेकिन पूरी प्रक्रिया स्थानीय स्तर पर पूरी न होने से हितग्राहियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रारंभिक जांच के बाद पात्र हितग्राहियों को एनओसी देकर बैतूल जनपद भेजा जा रहा है, जिससे गरीब और जरूरतमंद परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

हितग्राहियों का कहना है कि योजना का उद्देश्य आर्थिक सहारा देना है, लेकिन मौजूदा व्यवस्था उनके लिए परेशानी का कारण बन गई है। बार-बार बैतूल जाने से यात्रा खर्च बढ़ रहा है और समय की भी बर्बादी हो रही है। कई लोगों ने बताया कि उन्हें अपने रोजमर्रा के काम छोड़कर जनपद कार्यालय और फिर बैतूल के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिससे उनकी आय भी प्रभावित हो रही है।

*अधिकारियों का तर्क: बैतूल में आयोजन, इसलिए वहीं जमा होंगे आवेदन*

इस संबंध में पंचायत इंस्पेक्टर संजय सावरकर ने बताया कि मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह कार्यक्रम इस बार बैतूल जनपद में आयोजित किया जा रहा है, इसलिए सभी आवेदन वहीं जमा कराए जा रहे हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि आमला जनपद पंचायत स्तर पर केवल आवेदन लेने और उनकी जांच की प्रक्रिया की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद पात्र हितग्राहियों को एनओसी जारी कर बैतूल भेजा जाता है, जहां अंतिम प्रक्रिया पूरी की जाती है।

योजना प्रभारी उमेश मासोतकर के अनुसार अब तक करीब 50 हितग्राहियों को एनओसी जारी की जा चुकी है और आगे भी यह प्रक्रिया जारी है। अधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था शासन के निर्देशों के तहत लागू की गई है।

*हितग्राहियों की पीड़ा: 8–10 चक्कर के बाद भी बैतूल जाना मजबूरी*

ग्राम हसलपुर के हितग्राही सनिल बेले ने बताया कि उन्होंने आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के लिए 8 से 10 बार जनपद पंचायत के चक्कर लगाए, लेकिन इसके बावजूद उन्हें बैतूल जाकर आवेदन जमा करने के लिए कहा गया।

उन्होंने बताया कि बैतूल आने-जाने में करीब ₹200 तक का खर्च आता है, जो गरीब परिवार के लिए बड़ी समस्या है। इसके अलावा बैतूल पहुंचने पर लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ता है, जिससे पूरा दिन खराब हो जाता है।

अन्य हितग्राहियों ने भी इसी तरह की परेशानी बताते हुए कहा कि यदि पूरी प्रक्रिया आमला में ही पूरी कराई जाए, तो उन्हें राहत मिल सकती है।

*प्रशासन से मांग*

हितग्राहियों ने प्रशासन से मांग की है कि मुख्यमंत्री कन्यादान योजना की पूरी प्रक्रिया स्थानीय स्तर (आमला) पर ही पूर्ण कराई जाए, ताकि गरीब परिवारों को अनावश्यक दौड़-भाग, समय की बर्बादी और आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके