शिक्षक पात्रता परीक्षा अनिवार्यता के खिलाफ मध्यप्रदेश शिक्षक संघ का विरोध
गौरझामर (मप्र): अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) से संबद्ध मध्यप्रदेश शिक्षक संघ ने शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को अनिवार्य बनाने वाले सर्वोच्च न्यायालय के हालिया फैसले के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ के प्रतिनिधिमंडल ने गौरझामर स्थित कार्यालय में क्षेत्रीय विधायक बृजबिहारी पटेरिया से मुलाकात कर मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा।
क्या है पूरा मामला?
माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने 1 सितंबर 2025 को सिविल अपील संख्या 1385/2025 में एक ऐतिहासिक लेकिन विवादित निर्णय दिया। इस फैसले के अनुसार, अब कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों के लिए, उनकी नियुक्ति तिथि चाहे जो भी हो, TET उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है।
इस निर्णय ने प्रदेश के लगभग 70 हजार और देशभर के करीब 25 लाख शिक्षकों की सेवा सुरक्षा, आजीविका और भविष्य में होने वाली पदोन्नति पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।
नियमों का हवाला: 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को थी छूट
संघ के ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि RTE एक्ट 2009 और NCTE की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना के तहत, 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को कानूनी रूप से 'Qualified and Exempted' श्रेणी में रखा गया था। मध्यप्रदेश में TET की बाध्यता 26 मार्च 2011 से प्रभावी हुई थी। नया न्यायिक निर्णय इन वैधानिक श्रेणियों के बीच के अंतर को नजरअंदाज करता है, जिससे दशकों से सेवा दे रहे शिक्षक अब "अयोग्य" होने के डर और मानसिक तनाव में हैं।
"शिक्षा की गुणवत्ता जितनी जरूरी है, उतनी ही जरूरी उन शिक्षकों की सेवा-सुरक्षा और सम्मान है जिन्होंने वर्षों तक शिक्षा व्यवस्था को अपने समर्पण से सींचा है।" — मध्यप्रदेश शिक्षक संघ
विधायक से हस्तक्षेप की मांग
शिक्षक संघ ने विधायक बृजबिहारी पटेरिया से निवेदन किया है कि वे इस गंभीर विषय को मुख्यमंत्री के समक्ष रखें। संघ की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
- पुनर्विचार याचिका (Review Petition): राज्य शासन और स्कूल शिक्षा विभाग सर्वोच्च न्यायालय में इस निर्णय के विरुद्ध पुनर्विचार याचिका दायर करें।
- विधायी संशोधन: विधानसभा और अन्य मंचों पर इस मुद्दे को उठाकर केंद्र सरकार तक बात पहुँचाई जाए ताकि लोकसभा और राज्यसभा में आवश्यक संशोधन विधेयक लाकर शिक्षकों के हितों का संरक्षण किया जा सके।
ज्ञापन सौंपने के दौरान मौजूद रहे प्रमुख नाम
इस अवसर पर संघ के प्रमुख पदाधिकारी और शिक्षक उपस्थित रहे, जिनमें भरत सिंह राजपूत, धर्मेंद्र दुबे, हरि कृष्ण चौबे, राजकुमार लोधी, महिपाल सिंह ठाकुर, संजय श्रीवास्तव, संजय पटेरिया, आनंद विश्वकर्मा, हरि शरण, श्रीमती केसर ठाकुर, मनोज जैन, ओमकार विश्वकर्मा, रामलाल चढ़ार, रामचरण कोरी, प्यारेलाल गौंड, पूरनलाल अहिरवार और कृष्ण कुमार ठाकुर शामिल थे।
स्थिरता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण
56 वर्षों से शिक्षकों के हितों की रक्षा कर रहे मध्यप्रदेश शिक्षक संघ का यह कदम प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में स्थिरता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब देखना यह है कि राज्य सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है।

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