विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर समूचे सतना जिले में प्रकृति के प्रति प्रेम और संरक्षण का अद्भुत उत्साह देखने को मिला। इसी क्रम में रैगांव विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत विभिन्न स्थानों पर 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के तहत व्यापक स्तर पर पौधरोपण एवं स्वच्छता अभियानों का सफल आयोजन किया गया। इस विशेष अवसर पर मध्य प्रदेश शासन की नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी ने अपनी सक्रिय सहभागिता दर्ज कराते हुए पर्यावरण संरक्षण का एक मजबूत संदेश समाज तक पहुँचाया। उनके नेतृत्व में हुए इन कार्यक्रमों ने न केवल स्थानीय नागरिकों को बल्कि आने वाली पीढ़ी को भी प्रकृति के साथ जुड़ने की प्रेरणा दी है।
शासकीय विद्यालय बाधी में स्वच्छता और प्रकृति का संगम
राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी का दौरा सबसे पहले ग्राम बाधी स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय परिसर में हुआ। यहाँ पहुँचते ही उन्होंने विद्यालय परिसर में चल रहे सघन स्वच्छता अभियान में स्वयं सहभागिता निभाई। स्वच्छता को ईश्वर की आराधना के समान मानते हुए उन्होंने परिसर की सफाई में हाथ बँटाया, जिससे वहाँ उपस्थित छात्रों और शिक्षकों में भारी उत्साह का संचार हुआ।
स्वच्छता कार्य पूर्ण होने के उपरांत, राज्यमंत्री ने विद्यालय परिसर में पौधरोपण किया। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित जनों को संबोधित करते हुए कहा कि एक स्वच्छ और हरा-भरा वातावरण ही बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए सर्वोत्तम आधार है। उन्होंने वृक्षारोपण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्रत्येक पौधा न केवल ऑक्सीजन का स्रोत है, बल्कि वह भविष्य की पीढ़ी के लिए एक अमूल्य उपहार है। उन्होंने ग्रामीणों और विद्यालय प्रबंधन से अपील की कि लगाए गए पौधों को केवल लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें एक बच्चे की भांति पोषित करना और उनका संरक्षण करना भी हमारी जिम्मेदारी है।
उसरार में 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान का संकल्प
विद्यालय परिसर के पश्चात, राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी सिंहपुर मंडल अंतर्गत ग्राम उसरार पहुँचीं। यहाँ वन विभाग द्वारा 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में राज्यमंत्री ने पूर्ण भक्ति भाव के साथ पौधरोपण किया और हरित एवं स्वच्छ भविष्य के निर्माण का अपना संकल्प दोहराया।
इस कार्यक्रम की मुख्य विशेषता 'एक पेड़ माँ के नाम' का संदेश था, जो सीधे मानवीय संवेदनाओं को छूता है। राज्यमंत्री ने अपने उद्बोधन में स्पष्ट किया कि माँ का स्थान संसार में सर्वोच्च है, और अपनी माँ के सम्मान में एक पौधा लगाना उस ऋण को चुकाने का एक छोटा सा प्रयास है जो प्रकृति और माँ ने हम पर चढ़ाया है। उन्होंने उपस्थित ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा:
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प्रकृति ही जीवन है: उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रकृति का संरक्षण किसी एक व्यक्ति का काम नहीं, बल्कि हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
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नागरिक कर्तव्य: उन्होंने प्रत्येक नागरिक से आव्हान किया कि वे अपने जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ या किसी भी शुभ अवसर पर कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसके संरक्षण का दायित्व भी लें।
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हरित सतना का स्वप्न: श्रीमती बागरी ने सतना जिले को हरा-भरा बनाने के अपने संकल्प को साझा किया और कहा कि ऐसे छोटे-छोटे कदम ही बड़े बदलाव की नींव रखते हैं।
जन-भागीदारी और वन विभाग की सक्रियता
इस पूरे कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारियों की भूमिका सराहनीय रही। उन्होंने न केवल विभिन्न प्रकार के छायादार और फलदार पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित की, बल्कि पौधरोपण की सही तकनीक के बारे में ग्रामीणों को प्रशिक्षित भी किया। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, वन विभाग के समर्पित कर्मचारियों, गणमान्य नागरिकों और गाँव की माताओं-बहनों ने पूरी ऊर्जा के साथ हिस्सा लिया।
ग्रामीण क्षेत्रों में जिस प्रकार का उत्साह इस विश्व पर्यावरण दिवस पर देखने को मिला, वह यह दर्शाता है कि अब गाँवों में भी पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। लोग समझ रहे हैं कि ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं का मुकाबला करने का सबसे प्रभावी अस्त्र 'वृक्षारोपण' ही है।
निष्कर्ष: सतत विकास की ओर एक कदम
सतना जिले के रैगांव विधानसभा क्षेत्र में आयोजित ये कार्यक्रम केवल एक औपचारिकता नहीं थे, बल्कि वे भविष्य की एक सशक्त तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। जब एक राज्यमंत्री स्वयं अपने हाथों से पौधे लगाती हैं और स्वच्छता अभियान में श्रमदान करती हैं, तो समाज में एक सकारात्मक संदेश जाता है।
वृक्षारोपण के साथ-साथ स्वच्छता का संदेश यह बताता है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए 'साफ-सफाई' और 'हरियाली' दोनों का साथ होना आवश्यक है। यदि हम अपने आस-पास के वातावरण को स्वच्छ रखेंगे, तभी वहाँ लगाए गए पौधे फलीभूत हो सकेंगे। राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी ने इस आयोजन के माध्यम से न केवल शासन की नीतियों को धरातल पर उतारा, बल्कि जनमानस को प्रकृति के प्रति संवेदनशील भी बनाया है। सतना के इस आयोजन को अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक आदर्श के रूप में देखा जा सकता है, जहाँ शासन और प्रशासन के साथ-साथ आम नागरिक कंधे से कंधा मिलाकर धरती को सहेजने के लिए आगे आए हैं।
image source: https://satna.mpinfo.org
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