मैहर जिले में जनसेवा और आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान के उद्देश्य से प्रशासनिक स्तर पर एक विशेष जनसुनवाई कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कलेक्टर मैहर श्रीमती बिदिशा मुखर्जी के मार्गदर्शन में आयोजित इस साप्ताहिक कार्यक्रम में जिले के सुदूर अंचलों से आए नागरिकों ने अपनी व्यथा अधिकारियों के सामने रखी। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित इस जनसुनवाई में कुल 134 आवेदन प्राप्त हुए, जिन पर प्रशासनिक अधिकारियों ने संवेदनशीलता के साथ सुनवाई की और उनके समाधान के लिए संबंधित विभागों को निर्देशित किया।
जनसुनवाई: शिकायतों का केंद्र बिंदु
मैहर कलेक्ट्रेट में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई का माहौल काफी व्यवस्थित था। अपर कलेक्टर संजना जैन ने एक-एक कर सभी आवेदकों की समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुना। यह जनसुनवाई केवल आवेदन लेने तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें समस्याओं की प्रकृति को समझकर उनके समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को समय-सीमा के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
इस अवसर पर एसडीएम मैहर श्रीमती दिव्या पटेल, डिप्टी कलेक्टर आशिमा पटेल समेत जिले के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधि उपस्थित थे। अधिकारियों की उपस्थिति ने यह सुनिश्चित किया कि जैसे ही कोई समस्या सामने आए, संबंधित विभाग के अधिकारी को उसका उत्तर देने या समाधान तलाशने के लिए मौके पर ही निर्देशित किया जा सके।
134 आवेदकों की उम्मीदें
मंगलवार को आयोजित इस जनसुनवाई में 134 आवेदनों का प्राप्त होना यह दर्शाता है कि आमजन को प्रशासन की इस व्यवस्था पर गहरा विश्वास है। इन आवेदनों में मुख्य रूप से:
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राजस्व संबंधी विवाद: भूमि सीमांकन, नामंत्रण और बटवारे जैसी समस्याएं।
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सामाजिक सुरक्षा पेंशन: पात्र हितग्राहियों द्वारा पेंशन संबंधी शिकायतों का निवारण।
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आधारभूत सुविधाएं: गांव में पानी, बिजली, सड़क और स्वच्छता संबंधी शिकायतें।
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आवास योजना: शासकीय आवास योजनाओं से वंचित परिवारों की गुहार।
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स्वास्थ्य एवं शिक्षा: सरकारी योजनाओं के लाभ से जुड़ी तकनीकी दिक्कतें।
अधिकारियों का दायित्व और प्रशासन का रुख
अपर कलेक्टर संजना जैन ने जनसुनवाई के दौरान सभी विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया कि किसी भी समस्या को लंबित न रखा जाए। उनका कहना था कि जनसुनवाई का मूल उद्देश्य ही यही है कि आम आदमी को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।
अधिकारियों को यह भी हिदायत दी गई कि वे आवेदनों का निपटारा करते समय यह सुनिश्चित करें कि फरियादी को समाधान की स्पष्ट जानकारी मिल सके। यदि किसी कारणवश आवेदन का निराकरण तत्काल संभव न हो, तो भी उसकी वस्तुस्थिति से आवेदक को अवगत कराना अनिवार्य है। इस तरह की कार्यप्रणाली से प्रशासन के प्रति जनता का विश्वास बढ़ता है और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता आती है।
जनसुनवाई के माध्यम से सुशासन
मैहर जिले में कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी के नेतृत्व में चलाई जा रही यह जनसुनवाई प्रक्रिया सुशासन की दिशा में एक बड़ा कदम है। अक्सर देखा जाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों के लोग छोटी-छोटी समस्याओं के लिए कार्यालयों के चक्कर काटते हैं, लेकिन जनसुनवाई जैसे मंच उन्हें सीधे जिला स्तर के अधिकारियों से बात करने का अवसर प्रदान करते हैं। यह सीधा संवाद ही प्रशासन और जनता के बीच की दूरी को कम करता है।
जनसुनवाई में आए आवेदनों की संख्या और उनके निराकरण की प्रक्रिया पर जिला प्रशासन की ओर से सतत निगरानी रखी जाती है। हर आवेदन को एक यूनिक आईडी के जरिए ट्रैक किया जाता है ताकि यह पता चल सके कि शिकायत का निपटारा हुआ या नहीं। यह डिजिटल मॉनिटरिंग प्रक्रिया शिकायतों के समयबद्ध निराकरण में काफी मददगार साबित हो रही है।
भविष्य के लिए संदेश
मैहर जिला प्रशासन की यह कवायद आने वाले दिनों में और अधिक प्रभावी होने वाली है। जनसुनवाई में मौजूद अधिकारियों का मानना है कि आवेदनों की संख्या बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि समस्याएं बढ़ गई हैं, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि अब लोग जागरूक हो रहे हैं और वे अपनी समस्याओं के निराकरण के लिए सही मंच तक पहुंच रहे हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वे हर मंगलवार को आयोजित होने वाली जनसुनवाई को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर भी समस्याओं के समाधान के लिए मैदानी अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे जनता की शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर हल करें।
image source : https://maihar.mpinfo.org

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