मैहर जिले में लगातार बढ़ रहे वायु प्रदूषण और बिगड़ते वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) को देखते हुए जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। कलेक्टर श्रीमती बिदिशा मुखर्जी की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, खनिज विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ जिले के बड़े औद्योगिक सीमेंट संस्थानों, क्रेशर संचालकों और चूना भट्टी संचालकों ने हिस्सा लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण में सुधार और प्रदूषण नियंत्रण के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी करना था।

AQI 161 दर्ज: पर्यावरण के लिए बढ़ा खतरा

बैठक के दौरान कलेक्टर ने मैहर जिले के वर्तमान वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के 161 प्रतिशत तक पहुंचने पर गहरी चिंता व्यक्त की। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि उद्योगों से उत्सर्जित होने वाला धूल और धुआं जनसामान्य के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण का यह बढ़ता स्तर पर्यावरण के लिए चुनौतीपूर्ण है और इसे नियंत्रित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। कलेक्टर ने औद्योगिक प्रतिष्ठानों को चेतावनी दी कि यदि प्रदूषण नियंत्रण के तय मानकों का शत-प्रतिशत पालन नहीं किया गया, तो संबंधित खदानों को बंद (क्लोजर) करने की कार्रवाई की जाएगी।

टास्क फोर्स का गठन और सख्त निरीक्षण

प्रदूषण की निगरानी और उद्योगों की कार्यप्रणाली की जांच के लिए प्रशासन ने जिला मुख्यालय मैहर के 20 किलोमीटर की परिधि में आने वाले सभी खनिज आधारित उद्योगों, क्रेशर संयंत्रों और अन्य औद्योगिक प्रतिष्ठानों के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है।

  • भौतिक सत्यापन: यह टास्क फोर्स सभी उद्योगों में डस्ट सप्रेशन सिस्टम, बैग फिल्टर, वाटर स्प्रिंकलर, बाउंड्री वॉल, ग्रीन बेल्ट, वृक्षारोपण और धूल-धुआं नियंत्रण के मानकों का भौतिक सत्यापन करेगी।

  • समय सीमा: कलेक्टर ने सभी संस्थानों को 10 दिवस की मोहलत दी है, जिसके भीतर उन्हें प्रदूषण नियंत्रण संबंधी समस्त कार्यवाहियां पूरी करनी होंगी।

  • निगरानी: कलेक्टर ने निर्देश दिए हैं कि सभी संस्थान धूल और धुआं उत्सर्जित करने वाले संवेदनशील स्थानों पर कैमरे लगाएं और इनका एक्सेस मॉनिटरिंग के लिए प्रशासन को उपलब्ध कराएं।

परिवहन और उत्खनन पर कड़े निर्देश

बैठक में अवैध उत्खनन, भंडारण और परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए निम्नलिखित निर्देश दिए गए:

  1. ओवरलोडिंग पर रोक: सड़कों पर निर्धारित क्षमता से अधिक और खुले स्वरूप में खनिजों का परिवहन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

  2. कानूनी सीमा: सभी खदान संचालक केवल अपनी स्वीकृत लीज (लीज क्षेत्र) के भीतर ही उत्खनन कार्य करेंगे।

  3. परिवहन नीति: वाहनों की क्षमता से अधिक टीपी (ट्रांजिट पास) जारी नहीं की जाएगी और ट्रांसपोर्टर्स को ओवरलोडिंग के प्रति सचेत किया जाएगा।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तकनीकी सुझाव

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने क्रेशर संचालकों को वैज्ञानिक तरीके से प्रदूषण कम करने के उपाय बताए:

  • वाटर स्प्रिंकलर: क्रेशर के डस्ट वाले स्थलों पर अनिवार्य रूप से वाटर स्प्रिंकलर चलाए जाएं।

  • हरित आवरण: क्रेशर के स्तर तक बाउंड्री वॉल का निर्माण हो और उसके चारों ओर तीन स्तरों में सघन वृक्षारोपण किया जाए।

  • कनवेयर बेल्ट: क्रेशर से सड़क तक पानी का छिड़काव हो और कनवेयर बेल्ट पूरी तरह से ढकी हुई (फुली कवर्ड) होनी चाहिए।

  • सुरक्षा मानक: 'जीरो डस्ट' के स्थान पर जूट बैग का उपयोग हो और हॉपर के पास जल छिड़काव किया जाए। इसके अलावा, यूनिट के बाहर आवश्यक जानकारी प्रदर्शित करने वाला डिस्प्ले बोर्ड लगाना अनिवार्य है।

निगरानी व्यवस्था का विस्तार

वर्तमान में मैहर में मां शारदा मंदिर की पहाड़ी पर एक AQI मीटर स्थापित है। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि शहर में अन्य स्थानों पर भी मीटर लगवाए जाएं और उनकी दिन में तीन बार रीडिंग लेकर विश्लेषण के लिए जिला प्रशासन को उपलब्ध कराई जाए।

पर्यावरण दिवस पर जन जागरूकता

कलेक्टर श्रीमती मुखर्जी ने बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में आगामी 5 जून को मैहर में एक विशाल जन जागरूकता रैली का आयोजन किया जाएगा। यह रैली स्टेडियम से घंटाघर तक निकाली जाएगी। उन्होंने सभी औद्योगिक संस्थानों और क्रेशर संचालकों को इस रैली में सक्रिय भागीदारी निभाने और मैहर जिले में अधिक से अधिक वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने का आह्वान किया है।

बैठक में पुलिस अधीक्षक अवधेश प्रताप सिंह, सीईओ जिला पंचायत शैलेन्द्र सिंह, एसडीएम दिव्या पटेल, एसपी मिश्रा, आरती सिंह और जनपद सीईओ अशोक तिवारी सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि पर्यावरण के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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