आमला। ग्राम साईखेड़ा के प्राचीन एवं पौराणिक तालाब को संरक्षित करने के उद्देश्य से अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत रविवार 22 मार्च 2026 को सुबह 10 बजे से साफ-सफाई अभियान की शुरुआत की गई।

यह अभियान पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के प्रेरणा स्रोत “तालाब, जल स्रोत एवं नदी शुद्धि अभियान” के अंतर्गत संचालित किया जा रहा है।

तालाब के आसपास गंदगी, जनजागरूकता की जरूरत

अभियान के दौरान तालाब के चारों ओर फैली गंदगी ने चिंता बढ़ा दी। स्थानीय लोगों ने बताया कि अज्ञानता व लापरवाही के चलते कुछ लोग पूजा-पाठ की सामग्री, प्लास्टिक की पन्नियां और कचरा तालाब में डाल रहे हैं, जिससे जल स्रोत प्रदूषित हो रहा है और जल जीवों को भी नुकसान पहुंच रहा है।

“जल है तो कल है” — कार्यशाला में दिया संदेश

गायत्री प्रज्ञापीठ आमला के प्रमुख ट्रस्टी बी.पी. धामोडे, शिशुपाल डडोरे एवं रमेश बेले ने “जल है तो कल है” विषय पर कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए ग्रामीणों को जल संरक्षण का महत्व समझाया।

उन्होंने बताया कि यज्ञ, हवन या पूजा के बाद बची सामग्री को जल स्रोतों में नहीं डालना चाहिए, बल्कि उसका उचित विसर्जन करना चाहिए, ताकि जल शुद्ध बना रहे।

धर्मों में भी जल संरक्षण का महत्व

वरिष्ठ अधिवक्ता मोहम्मद शफी खान ने कहा कि इस्लाम धर्म में भी जल स्रोतों को स्वच्छ रखने की प्रेरणा दी गई है। उन्होंने प्रकृति संरक्षण को सभी धर्मों का साझा संदेश बताया।

अतिक्रमण, गंदगी और खुले में शौच से बिगड़ रही स्थिति

श्री कृष्ण लीला फाउंडेशन के संयोजक राजेंद्र उपाध्याय एवं पर्यावरण प्रेमी सदाराम झरबड़े ने प्रशासन से मांग की कि तालाब के आसपास फैले अतिक्रमण, गंदगी और खुले में शौच की समस्या पर तत्काल रोक लगाई जाए।

उन्होंने बताया कि तालाब के घाट जर्जर हो चुके हैं, जगह-जगह गंदगी फैली है और कुछ लोग मवेशी बांधकर गोबर भी जमा कर रहे हैं, जिससे जल स्रोत लगातार प्रदूषित हो रहा है।

ग्राम पंचायत की भूमिका पर सवाल

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह स्थिति ग्राम पंचायत की अनदेखी का परिणाम है। पंचायत को तालाब की नियमित साफ-सफाई, घाटों के सुधार और संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।

सैकड़ों साल पुरानी है जल धरोहर

गांव के बुजुर्ग बाबूराव मकोड़े, भूरेन्द्र मकोड़े, पांडुरंग देशमुख, आर.के. बनखेड़े और मधुकर मकोड़े ने बताया कि यह तालाब सैकड़ों साल पुराना है। पहले मालगुजार इसकी देखरेख करते थे और इसका उपयोग पेयजल व कृषि कार्यों के लिए होता था।

बाद में न्यायालयीन प्रक्रिया के पश्चात यह तालाब ग्राम पंचायत को मिला, लेकिन उचित देखरेख के अभाव में इसकी स्थिति बिगड़ती चली गई।

जनभागीदारी से सहेजी जाएगी जल धरोहर

गायत्री परिवार ने संकल्प लिया है कि जनजागरूकता और श्रमदान के माध्यम से इस तालाब को पुनः स्वच्छ और उपयोगी बनाया जाएगा। अभियान में गायत्री परिवार के कार्यकर्ता, ग्रामीण, स्थानीय निवासी और पर्यावरण प्रेमी बड़ी संख्या में शामिल हुए।