मध्य प्रदेश के सतना जिले में ग्रामीण विकास की रफ्तार को तेज करने और शासन की जन-कल्याणकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के उद्देश्य से एक विस्तृत और महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। गुरुवार को सतना कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित इस उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता सतना कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने की। इस बैठक में जिला पंचायत और सभी जनपद पंचायतों के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से हिस्सा लिया। कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिए कि ग्रामीण विकास की योजनाओं और कार्यक्रमों में अपेक्षित प्रगति लानी होगी और किसी भी प्रकार की लापरवाही या ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) जिला पंचायत शैलेन्द्र सिंह, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आर.ई.एस.) के कार्यपालन यंत्री लाजरूस केरकेट्टा, लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (एलडीएम) गौतम शर्मा, जिला पंचायत की विभिन्न योजनाओं के प्रभारी अधिकारी, जिले की सभी जनपद पंचायतों के सीईओ, सहायक यंत्री, एपीओ (अतिरिक्त परियोजना अधिकारी) और ब्लॉक कोआर्डिनेटर प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
अधिकारियों के लिए क्षेत्र भ्रमण और एम.डी.एम. निरीक्षण के अनिवार्य निर्देश कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने बैठक में अधिकारियों के फील्ड वर्क और जमीनी स्तर पर निगरानी तंत्र को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया।
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एम.डी.एम. की जांच: उन्होंने सभी अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि जब भी वे किसी भी शासकीय कार्य से क्षेत्र के भ्रमण (फील्ड विजिट) पर जाएं, तो 'प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना' के तहत शासकीय शालाओं (स्कूलों) में बच्चों को वितरित होने वाले मध्यान्ह भोजन (एम.डी.एम. - मिड डे मील) की गुणवत्ता का निरीक्षण अनिवार्य रूप से करें। स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में दिए जा रहे पके हुए भोजन की गुणवत्ता और पोषण मानकों का परीक्षण करना अब हर अधिकारी की जिम्मेदारी का हिस्सा होगा। जिले में वर्तमान में 2283 शालाओं में इस योजना के तहत एम.डी.एम. का वितरण किया जा रहा है।
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विकास कार्यों का अवलोकन: अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्र भ्रमण के दौरान वहां चल रहे विभागीय विकास कार्यों और हितग्राहियों की सफलता की कहानियों से संबंधित गतिविधियों का सूक्ष्मता से अवलोकन करें।
मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान और जनसंवाद की तैयारियां बैठक में 'मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान' की तैयारियों को लेकर भी विस्तार से चर्चा की गई।
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यह विशेष अभियान शुक्रवार से नागौद से शुरू होने जा रहा है, जिसमें सघन क्षेत्र भ्रमण, जनसंवाद और निरीक्षण के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
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कलेक्टर ने नागौद दौरे की तैयारियों की बिंदुवार जानकारी ली और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए ताकि यह अभियान अपने उद्देश्यों में पूरी तरह सफल हो सके और जनता की समस्याओं का मौके पर ही निराकरण किया जा सके।
आजीविका और रोजगार के नए अवसरों को प्रोत्साहन: मधुमक्खी पालन और बांस की खेती सतना जिले के ग्रामीण और पहाड़ी अंचलों में स्थानीय निवासियों और विशेषकर महिलाओं की आजीविका को बेहतर बनाने के लिए कलेक्टर ने कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण और अभिनव सुझाव दिए।
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मधुमक्खी पालन: उन्होंने मझगवां और परसमनिया जैसे पहाड़ी क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए वहां मधुमक्खी पालन को आजीविका के एक बेहतरीन और मुनाफे वाले साधन के रूप में विकसित करने पर जोर दिया। इसके लिए विशेष रूप से मझगवां क्षेत्र के पिंडरा, महतैन, बरौंधा और उचेहरा विकासखंड के परसमनिया में मधुमक्खी पालन को युद्धस्तर पर प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए गए हैं।
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बांस की खेती: इसी कड़ी में स्व-सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए उन्हें बांस की खेती करने और बांस से बने विभिन्न उत्पादों को तैयार करने के कार्य से जोड़ने के भी स्पष्ट निर्देश दिए गए।
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डीएमएफ (DMF) फंड का उपयोग: कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि 'जी राम जी' (G Ram G) अथवा अन्य योजनाओं की तय गाइडलाइन के अनुसार जो आवश्यक कार्य स्वीकृत नहीं किए जा सकते हैं, उन जन-उपयोगी कार्यों को 'डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन' (डीएमएफ) फंड से राशि स्वीकृत कराने के लिए प्रस्ताव बनाकर तत्काल प्रस्तुत किए जाएं।
'जी राम जी' और 'एक बगिया मां के नाम' योजना की विस्तृत समीक्षा बैठक में 'विकसित भारत जी राम जी' योजना के तहत चल रहे कार्यों की गहन समीक्षा की गई, जिसमें कई महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए:
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सभी गांवों में कार्य योजना तैयार कर ली गई है और इसके अनुमोदन के लिए ग्राम सभाओं का सफल आयोजन भी पूर्ण कर लिया गया है।
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तैयार की गई कार्य योजनाओं को सिपरी (SIPRI) पोर्टल तक अनुमोदन के लिए भेज दिया गया है।
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इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत जिले की 450 ग्राम पंचायतों में 113 कार्य धरातल पर प्रारंभ कर दिए गए हैं, जबकि 419 कार्यों को सिपरी में मैप कर दिया गया है। हालांकि, 178 कार्य अभी भी लंबित स्थिति में हैं, जिन्हें जल्द शुरू करने की आवश्यकता है।
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कुल मिलाकर 'विकसित भारत जी राम जी' योजना में 7703 पूर्व के स्वीकृत कार्य और 2884 नए कार्यों को संचालित किया जाएगा।
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इसके अतिरिक्त, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने वाले 'एक बगिया मां के नाम' अभियान के तहत 457 कार्य भी प्रगति पर हैं।
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कुल मिलाकर जिले में इस समय 10 हजार 994 कार्य चल रहे हैं, जिनसे लगभग 1 लाख 23 हजार हितग्राही सीधे तौर पर लाभान्वित हो रहे हैं।
धीमी प्रगति वाले उपयंत्रियों पर कार्रवाई के सख्त निर्देश समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि जिले में केवल सोहावल विकासखंड को छोड़कर, अन्य सभी विकासखंडों में निर्माण कार्यों की प्रगति काफी धीमी और निराशाजनक है।
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कलेक्टर ने इस पर गहरी नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को अगले दो सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है कि वे सभी अपूर्ण कार्यों को तेजी से पूरा करें। दो सप्ताह बाद इन कार्यों की पुनः सघन समीक्षा बैठक ली जाएगी।
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विशेष रूप से मझगवां और रामपुर बघेलान विकासखंडों के उपयंत्रियों (सब-इंजीनियर्स) की लचर कार्यप्रणाली को लेकर कलेक्टर ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने निर्देश दिए कि इन उपयंत्रियों को सीआर (CR) वार्निंग के साथ 'नो वर्क नो पे' (काम नहीं तो वेतन नहीं) का कड़ा नोटिस तुरंत जारी किया जाए। यदि इसके बाद भी निर्धारित समय-सीमा में प्रगति रिपोर्ट नहीं आती है, तो उनके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
प्रधानमंत्री आवास योजना और अन्य निर्माण कार्यों की अद्यतन स्थिति
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पीएम आवास: प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत जिले में शेष बचे 4 हजार आवासों के अभी भी अपूर्ण होने पर कलेक्टर ने गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने इन आवासों को जल्द से जल्द पूरा कराने की रणनीति और विस्तृत कार्य योजना की जानकारी ली। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए कि वे अपनी प्लानिंग के अनुसार हितग्राहियों को निर्माण सामग्री की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित कराएं। बैठक में यह भी बताया गया कि विभिन्न कारणों से 1056 आवास अब किसी भी स्थिति में पूर्ण नहीं हो सकेंगे। ऐसे मामलों में वसूली के लिए तत्काल आरआरसी (RRC) जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
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स्वच्छ भारत मिशन: इस मिशन के तहत स्वीकृत 257 सामुदायिक स्वच्छता परिसरों में से वर्तमान में केवल 15 परिसरों का ही निर्माण कार्य चल रहा है, जो की चिंताजनक है।
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अटल सामुदायिक व पंचायत भवन: जिले में स्वीकृत 35 अटल सामुदायिक भवनों में से 2 कार्य और 40 अटल पंचायत भवनों में से 4 कार्य अभी तक प्रारंभ ही नहीं हुए हैं। कलेक्टर ने सभी जनपद सीईओ को निर्देश दिए हैं कि वे इन अप्रारंभ कार्यों वाले स्थानों का व्यक्तिगत मौका निरीक्षण करें और स्थानीय एसडीएम (SDM) के संज्ञान में मामला लाकर जल्द से जल्द निर्माण कार्य प्रारंभ करवाएं।
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आंगनवाड़ी भवन: कुल 79 स्वीकृत आंगनवाड़ी केंद्र भवनों में से 30 का निर्माण पूर्ण हो चुका है, लेकिन 31 कार्यों को जमीनी विवादों के कारण शुरू नहीं किया जा सका है। इस पर कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन स्थानों पर विवाद है, वहां भवन को आबादी क्षेत्र के पास किसी प्राथमिक शाला भवन या पंचायत भवन के नजदीक बनाया जाए। यदि फिर भी जमीन अनुपलब्ध रहती है, तो इन केंद्रों को अन्य उपयुक्त स्थानों पर स्थानांतरित करने की त्वरित कार्यवाही की जाए।
आजीविका मिशन और सीसीएल वितरण में सतना 12वें स्थान पर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की समीक्षा करते हुए बताया गया कि सीसीएल (कैश क्रेडिट लिमिट) वितरण के मामले में सतना जिला वर्तमान में पूरे मध्यप्रदेश में 12वें स्थान पर है।
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कलेक्टर ने इस रैंकिंग को सुधारने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे जिले के वार्षिक लक्ष्य के अनुरूप 10 से 20 प्रतिशत अधिक प्रकरण 30 अगस्त तक सभी संबंधित बैंकों में प्रस्तुत कर दें, ताकि आगामी सितम्बर माह से इन प्रकरणों में ऋण स्वीकृति की कार्यवाही निर्बाध रूप से की जा सके।
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इस दौरान एक बड़ी लापरवाही पर कलेक्टर ने सख्त कार्रवाई की। उचेहरा विकासखंड के परसमनिया क्षेत्र के महिला स्व-सहायता समूहों को पत्थर-पटिया खदान से संबद्ध कर रोजगार देने के महत्वपूर्ण प्रकरणों को टीएल (टाइम लिमिट) की बैठक में प्रस्तुत नहीं करने पर कलेक्टर ने जनपद पंचायत उचेहरा के सीईओ पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की और उन्हें तत्काल प्रभाव से कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
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बैठक के अंत में 'धरती आबा' अभियान की प्रगति की भी विस्तृत समीक्षा की गई और आवश्यक निर्देश जारी किए गए।
image source : https://satna.mpinfo.org
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